राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में खेतों से बंदर व पक्षियों को भगाने के लिए कच्चे धातु के उपकरण में विस्फोट करना देवेश नामक 16 वर्षीय किशोर के लिए भारी पड़ा। युवक ने विस्फोटक के लिए कटोरी का इस्तेमाल किया। इस वजह से विस्फोट इतना तेज हुआ कि कटोरी के टुकड़े हो गए और एक टुकड़ा किशोर के गले में धंस गया। इस वजह से गले में छेद हो गया और धातु का टुकड़ा थायराइड ग्लैंड को चीरते हुए रीढ़ की हड्डी में जा धंसा।

परिजनों ने दिल्ली लाकर उसे इलाज के लिए गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया। जहां स्पाइनल सर्जरी और हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने मिलकर उसकी सर्जरी की और उसके गले दो सेंटीमीटर लंबा धातु का टुकड़ा निकाला। यह घटना पांच दिन पहले की है। सर्जरी के बाद अब पीड़ित का स्वास्थ्य ठीक है। जल्दी ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। 

डॉक्टर कहते हैं कि यह सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण थी। क्योंकि भोजन नली, सांस की नली व खून की नलियों को बचाते हुए गले में रीढ़ की हड्ड़ी तक पहुंचना था। सर्जरी के दौरान यदि सांस की नली व नसों को नुकसान पहुंचता तो पीड़ित को बचा पाना मुश्किल होता। डॉक्टर इस मामले को देखकर हैरान हैं। उनका कहना है कि गनीमत है कि धातु के टुकड़े से सांस की नली व नसों को नुकसान नहीं पहुंचा। वरना पीड़ित की जान जा सकती थी।

हेड एंड नेक सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. संगीत अग्रवाल ने कहा कि गांवों में खेतों से भगाने के लिए लोग किसी कच्चे धातु के उपकरण से विस्फोट करते हैं। इसके लिए किसी पतली पाइप में पोटाश व सल्फर डालकर विस्फोट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पीड़ित ने की गलती यह रही कि उसने विस्फोट करने के लिए कटोरी का भी इस्तेमाल किया। विस्फोट होने पर बदकिस्मती से उस कटोरी का टुकड़ा उसके गले में धंस गया। अस्पताल के स्पाइनल सर्जरी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. रुपिंदर एस चहल ने कहा कि जांच करने पर पता चला कि धातु का टुकड़ा मुड़ गया था। इससे गला काफी क्षतिग्रस्त हुआ था और गले की हड्डी में डेढ़ सेंटीमीटर का छेद हो गया था। डॉक्टर कहते हैं कि टुकड़ा मुड़ा होने के बावजूद किसी अंगों को नुकसान पहुंचाए बगैर उसे निकाला जा सका।

इसके बाद पीड़ित की थायराइड ग्लैंड को ठीक किया गया। अब पीड़ित ठीक वह। वह चलने लगा है और बातचीत भी करने लगा है।डॉक्टर कहते हैं कि पशु पक्षियों को डराने के लिए इस तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए। क्योंकि इससे लोगों के घायल होने का खतरा बना हुआ है। इसकी जगह खेतों में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ध्वनि उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। 

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