नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। बिजली आपूर्ति में सुधार से कारोबार बढने के साथ ही प्रदूषण की समस्या भी हल हो रही है, राजधानी इसका उदाहरण है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू होने से जेनरेटर चलाने पर लगी रोक से जहां एनसीआर के शहरों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, राजधानी में इस प्रतिबंध से किसी को कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि 24 घंटे सस्ती बिजली आपूर्ति की वजह से यहां जेनरेटर का शोर पहले ही थम चुका है।

पिछले दिनों डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में आयोजित सी-40 शिखर सम्मेलन को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी कहा था कि बिजली आपूर्ति सुधरने से दिल्ली में पांच लाख जेनरेटर बंद हो गए हैं।

चांदनी चौक हो या कनॉट प्लेस या फिर कोई और बाजार हर जगह जेनरेटर का शोर सुनाई देता था। शादी व अन्य समारोह सहित धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में भी जेनरेटर का प्रयोग धड़ल्ले से होता था। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की सख्ती और दिल्ली सरकार व बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रयास से अब स्थिति बदल गई है। बिजली की मांग में प्रत्येक वर्ष बढ़ोतरी होने के बावजूद निर्बाध तरीके से उपभोक्ताओं को कम रेट पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

एक दिन में मिलता है अस्थायी कनेक्शन

शादी विवाह व अन्य समारोह, रामलीला, दुर्गा पूजा जैसे आयोजन के लिए 24 घंटे में में अस्थायी बिजली कनेक्शन दे दिया जाता है। डिस्कॉम के अधिकारियों का कहना है कि आयोजक के पहचान पत्र और आयोजन स्थल से संबंधित कागजात के आधार पर अस्थायी कनेक्शन के लिए ऑनलाइन या फिर कार्यालय में जाकर आवेदन किया जा सकता है। जेनरेटर का प्रयोग महंगा भी पड़ता है। डिस्कॉम जहां 8.75 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली दे रहा है, वहीं जेनरेटर से यह खर्च 15 से 20 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच जाता है।

दिल्ली में बंद हो गए हैं कोयला आधारित बिजली संयंत्र

राजधानी में अब एक भी कोयला आधारित बिजली संयंत्र नहीं है। इंद्रप्रस्थ और राजघाट संयंत्र कई वर्ष पहले बंद हो गए थे। अब बदरपुर संयंत्र भी बंद कर दिया गया है। इसकी जगह गैस आधारित बवाना बिजली संयंत्र में उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। 15 सौ मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र से पहले तीन सौ मेगावाट के करीब बिजली मिलती थी। इस समय लगभग पांच सौ मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं सौर ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बीएसईएस के बिजली वितरण क्षेत्र में 65 मेगावाट तथा टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के क्षेत्र में 31 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

मजबूत किया गया है आधारभूत ढांचा

दिल्ली में साल दर साल बिजली की मांग बढ़ रही है। इस वर्ष दो जुलाई को बिजली की अधिकतम मांग 7409 मेगावाट तक पहुंच गई थी। इसे ध्यान में रखकर बिजली के नेटवर्क को मजबूत किया गया है। ट्रांसमिशन लाइन और बिजली ग्रिड की क्षमता बढ़ाई गई है। दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार साढ़े दस हजार मेगावाट तक मांग पहुंचने के बावजूद बिजली आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।

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Posted By: Mangal Yadav

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