नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी के कारण राजधानी के संपन्न परिवारों के बच्चों में भी रिकेट्स की समस्या बढ़ रही है। इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर (आइएसआइसी) के कंसल्टेंट डा. सुर्भित रस्तोगी ने कहा कि पिछले एक साल से हर माह औसतन 12 बच्चे हड्डी, जोड़ों के दर्द और पैर की समस्या लेकर आ रहे हैं। ऐसे बच्चों में रिकेट्स का पता चला है। जबकि कोरोना से पहले हर माह ऐसे चार मामले आते थे। यह करीब 300 प्रतिशत की वृद्धि है।

डा. रस्तोगी ने बताया कि लाकडाउन के कारण लंबे समय से घर से बाहर न निकलने से बच्चों में विटामिन-डी की कमी हो रही है। सूरज के संपर्क में न आने के कारण उनमें रिकेट्स की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि पहले गरीब परिवारों के बच्चों में पोषण की कमी के कारण यह समस्या होती थी। पिछले एक साल में बच्चे बहुत ही कम बाहर निकले हैं जिससे उन्हें सूर्य की रोशनी से विटामिन डी नहीं मिल पा रहा है। इसलिए संपन्न परिवारों के बच्चों में भी यह समस्या हो रही है। यह समस्या दो से 12 साल के बच्चों में अधिक देखने को मिल रही है।

उधर राजधानी में कोरोना की संक्रमण दर 0.12 फीसद से घटकर 0.08 फीसद पर आ गई है। इस वजह से मंगलवार को कोरोना के 50 नए मामले आए। वहीं, 65 मरीज ठीक हुए, लेकिन इस दौरान चार मरीजों की मौत हो गई। एक अगस्त को संक्रमण दर 0.12 फीसद हो गई थी, तब 85 मामले आए थे। हालांकि, उस दिन 72,447 सैंपल की जांच भी हुई थी। इसके तहत 50,319 सैंपल की आरटीपीसीआर व 22,128 सैंपल की एंटीजन जांच हुई थी। वहीं, पिछले 24 घंटे में 64,276 सैंपल की जांच हुई। इसके तहत 39,498 सैंपल की आरटीपीसीआर व 24,778 सैंपल की एंटीजन जांच हुई। इस लिहाज से कुल 8,171 सैंपल कम जांच हुई।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दिल्ली में कोरोना के अब तक कुल 14 लाख 36 हजार 451 मामले आ चुके हैं, जिनमें से 14 लाख 10 हजार 874 मरीज ठीक हो चुके है। इस तरह मरीजों के ठीक होने की दर 98.21 फीसद है। वहीं, मृतकों की संख्या 25,058 हो गई है। इस तरह मृत्यु दर 1.74 फीसद है। इसके अलावा मौजूदा समय में सक्रिय मरीजों की संख्या 519 है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 291 है। वहीं, कंटेनमेंट जोन की संख्या 282 है।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari