नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। Upper Caste Reservation bill संसद में भले ही सवर्णों के लिए 10 फीसद आरक्षण का विधेयक पारित हो गया हो, लेकिन कांग्रेस ने इसे अंदरूनी तौर पर स्वीकार नहीं किया है। पार्टी की रणनीति इस विधेयक को प्रधानमंत्री मोदी के एक जुमले के तौर पर प्रस्तुत करने की है। प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेताओं का कहना है कि संविधान में 50 फीसद से अधिक आरक्षण पर स्पष्ट प्रतिबंध है। बहुत संभव है कि संविधान पीठ भी इससे सहमति नहीं जताए।

प्रदेश कांग्रेस के एक पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि सरकार ने जिस विधेयक को मंजूरी दी है, उसके मानक भी अजीब से हैं। गांवों में जहां पांच एकड़ तक जमीन रखने वालों को इसके लाभ का पात्र माना गया है वहीं शहरों में दो सौ गज जमीन रखने वालों को इसके योग्य करार दिया गया है। इन दोनों ही श्रेणियों के लोगों को आर्थिक दृष्टि से कमजोर नहीं कहा जा सकता।

प्रदेश के एक अन्य वरिष्ठ नेता कहते हैं कि एक मानक यह भी सामने आया है कि सालाना आठ लाख रुपये तक की आमदनी वाला इस आरक्षण का लाभ उठा सकता है। सवाल है कि इतनी आय वाला व्यक्ति तो आयकर भी भरता है। ऐसे में उसे गरीब कैसे कहा जा सकता है?

वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली कहते हैं कि अगर सरकार वाकई इस मुद्दे पर गंभीर थी तो इसके लिए कार्यकाल के आखिरी संसद सत्र का इंतजार क्यों किया गया। कांग्रेस राफेल डील की तरह इस विधेयक का भी हर पहलू मतदाताओं के सामने रखेगी और उन्हें सच से अवगत कराएगी।