नई दिल्ली, जेएनएन। शहरों में जिम का चलन तेजी से बढ़ा है। शरीर को सेहतमंद रखने के लिए व्यायाम जरूरी भी है, लेकिन जिम में भारी भरकम उपकरणों से संभलकर व्यायाम करें। जिम में लापरवाही व व्यायाम का गलत तरीका लकवा जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences, New Delhi) में ऐसे मामले सामने आए हैं। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. एमवी पद्मा श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि जिम में व्यायाम करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में लकवा की बीमारी बढ़ रही है। युवा भी इससे पीड़ित हो रहे हैं। हर 20 सेकेंड में एक व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। इसका एक बड़ा कारण लोगों में जागरूकता का अभाव व समय पर इलाज नहीं मिलना है, जबकि मौजूदा समय में यदि लकवा होने के 24 घंटे के अंदर भी मरीज अस्पताल पहुंच जाए, तो उसका इलाज हो सकता है। उन्होंने कहा कि लकवा के 14 फीसद मामलों में जिम, डांस सहित हादसा इस बीमारी का कारण बनता है।

अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाए तो न करें नजरअंदाज

एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. रोहित भाटिया ने कहा कि अक्सर लोग इस बीमारी के लक्षण पहचान नहीं पाते। दरअसल अचानक आवाज लड़खड़ाने लगे, आंख के समाने अंधेरा छा जाए और दिखाई न दे, चलने में परेशानी होने लगे, अचानक तेज दर्द व चक्कर आए तो इस तरह की हरकतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह लकवा का लक्षण हो सकता है।

जिला अस्पतालों में प्राथमिक इलाज की हो सुविधा

डॉक्टर कहते हैं कि यह देखा गया है कि ज्यादातर लकवा पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इसलिए इलाज का फायदा नहीं होता। खासतौर पर दूरदराज के इलाकों में यह समस्या अधिक है। इसलिए जिला अस्पतालों में स्ट्रोक के प्राथमिक इलाज की सुविधा विकसित करना जरूरी है। इसके तहत सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, मस्तिष्क के नसों में ब्लॉकेज दूर करने की दवा और एक ऐसा डॉक्टर होना जरूरी है जो सीटी स्कैन देखकर दवा दे सके।

लकवा से बचने के लिए यह उपाय जरूरी

रक्तचाप, मधुमेह व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें। धूमपान व शराब का सेवन न करें। मोटापा से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें।

लकवा से पीड़ित 25 फीसद मरीज होते हैं युवा

डॉ. एमवी पद्मा श्रीवास्तव ने कहा कि जीवनशैली लकवा का बड़ा कारण बन रहा है। जिसमें गलत खानपान भी शामिल है। यह देखा गया है कि अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले लकवा के मरीजों में करीब 25 फीसद युवा होते हैं। जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम होती है। इस बीमारी से पीड़ित हर चौथा मरीज कम उम्र का होता है। गलत जीवनशैली के कारण युवा इस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं।

मरीजों के लिए स्ट्रोक मैप तैयार होंगे

डॉक्टर पद्मा एम श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए स्ट्रोक मैप तैयार करने जा रही है। ब्रेन मैप के जरिए यह पता चल सकेगा कि ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को किस अस्पताल ले जाना है। सीटी स्कैन की सुविधा, ब्रेन स्ट्रोक की दवाएं और थ्रोमेबोलाइसिस की सुविधा वाले अस्पतालों की जानकारी इसमें उपलब्ध होगी।

प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का असर

डॉक्टर पद्मा ने बताया कि प्रदूषण और जलवायु का न्यूरो समेत तमाम बीमारियों से क्या संबंध है इसका पता लगाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एक शोध कर रहा है। फिलहाल देखा गया है कि प्रदूषण न्यूरो की बीमारियों के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है।

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Posted By: JP Yadav

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