नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) चुनाव परिणाम घोषित होने के दो माह बाद भी कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। अभी भी पुराने प्रबंधक कमेटी का कामकाज संभाल रहे हैं जिसका विरोध शुरू हो गया है। डीएसजीएमसी में फाइनेंसियल रिसीवर नियुक्त करने की मांग उठने लगी है। डीएसजीएमसी के पूर्व अध्यक्ष और शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने इसे लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखा है जिससे कि इसके कामकाज में पारदर्शिता आ सके।

गुरु घर के फंड का हो रहा है दुरुपयोग

सरना का कहना है कि पंजाबी का ज्ञान नहीं होने के कारण कई निर्वाचित सदस्यों की सदस्यता खतरे में है। इससे संबंधित मामले अदालत में लंबित हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्यों व सहयोगी पार्टी जग आसरा गुरु ओट (जागो) और अकाली लहर के नेताओं के साथ बैठक की। सरना के साथ ही डीएसजीएमसी के पूर्व अध्यक्ष हरविंदर सिंह सरना और मंजीत सिंह जीके ने कहा कि इस मामले में वह उपराज्यपाल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि डीएसजीएमसी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिरसा चुनाव हार चुके हैं। पंजाबी का ज्ञान नहीं होने के कारण उन्हें कमेटी के सदस्य के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है बावजूद वह अध्यक्ष बने हुए हैं। कमेटी में फंड का दुरुपयोग हो रहा है। गुरु घर के फंड का पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए दुरुपयोग हो रहा है। इसे तुरंत रोकने की जरूरत है। उपराज्यपाल को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

कमेटी पर सरकार का कब्जा कराना चाहते हैं सरनाः सिरसा

मनजिंदर सिंह सिरसा ने डीएसजीएमसी में फाइनेंशियल रिसीवर नियुक्त करने की मांग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरना डीएसजीएमसी पर सरकार का कब्जा कराना चाहते है जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिख किसी भी कीमत पर गुरुधामों और गुरुद्वारा प्रबंधन पर सरकार का कब्जा नहीं होने देंगे। संगत द्वारा चुने गए शिरोमणि अकाली दल बादल के सदस्य किसी भी तरह के बलिदान देने को तैयार हैं।

Edited By: Prateek Kumar