नई दिल्ली (जेएनएन)। केंद्र सरकार की ‘एडाप्ट हैरिटेज स्कीम’ के तहत में चल रहे सुंदरीकरण के कार्य में वे निर्माण भी निशाना बन रहे हैं जो आजादी से पहले के हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की अनुमति पर इस स्मारक को गोद ले चुके राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) ने इन निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया है। इनमें आजादी से पहले अंग्रेजों के दफ्तर चलाए जाने के प्रमाण हैं।

आजादी के समय जो लोग पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली आए थे, उनमें बहुत से लोगों को पुराने किले में शरण दी गई थी। इन लोगों के बच्चों की शिक्षा के लिए यहां की इमारत में स्कूल खोला गया था। यह इमारत पुरानी स्कूल बिल्डिंग के नाम से जानी जाती है। उन लोगों रहने के लिए जगह देने के बाद किले को खाली करा लिया गया। इसके बाद से इन निर्माणों को एएसआइ कार्यालय के लिए उपयोग कर रहा था। पिछले तीन माह से एनबीसीसी पुराने किले में सुंदरीकरण की योजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत इन निर्माण को तोड़ कर इस एरिया को समतल बनाया जाना है।

सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए काम कर रही संस्था द्रोपदी ड्रीम ट्रस्ट की चेयरमैन नीरा मिश्र ने इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री डॉ. महेश शर्मा को पत्र लिखकर निर्माण को तोड़े जाने का कार्य तुरंत बंद कराने को कहा है। नीरा का कहना है कि इन निर्माण को लेकर 2016-17 में उन्होंने सांस्कृतिक मंत्रालय के तत्कालीन सचिव एनके सिन्हा के साथ बैठक की थी।

बैठक में एएसआइ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्हें इन निर्माण में एएसआइ का संग्रहालय बनाने का सुझाव दिया गया था, जिस पर वह राजी हो गए थे। नीरा का कहना है कि वर्ष 1903 में पुराने किले में बसे गांव को हटाया गया था।

ऐसा अनुमान है कि ये निर्माण उस समय भी मौजूद थे। ये एएसआइ के रिकार्ड में कब से हैं, यह जानने के लिए उन्होंने एएसआइ से रिकार्ड मांगा है, लेकिन वह नहीं दे रहा है। उनकी मांग है कि इन निर्माण को तोड़े जाने का काम तुरंत रोका जाना चाहिए। इस संबंध में बात करने के लिए एएसआइ की महानिदेशक ऊषा शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। 

By JP Yadav