नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। देश के 21 राज्यों व दो केंद्रशासित प्रदेशों में धूल फांक रही करोड़ों की शत्रु संपत्ति का अगले माह राष्ट्रीय सर्वे कर उनका सीमांकन किया जाएगा। सीमांकन के बाद भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर गृह मंत्रालय का उस पर कब्जा होगा। मंत्रालय आगे उसकी नीलामी करेगा। बीते माह चिंतन शिविर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शत्रु संपत्ति के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद यह कदम उठाया जा रहा है। शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक विभाग, रक्षा संपदा महानिदेशालय (डीजीडीई) व जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस राष्ट्रीय सर्वे काे अंजाम दिया जाएगा।

पायलट स्तर पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा से होगी शुरूआत 

पायलट स्तर पर सर्वे की शुरुआत नोएडा व ग्रेटर नोएडा की 70 पाकेट से होगी, जहां शत्रु भूमि हैं। भारत में शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भारत में कुल 12,615 शत्रु संपत्ति हैं। इनमें से 11,607 भूमि चिह्नित हैं। पर ये भूमि कितने एकड़ में फैली है, उसकी ठोस जानकारी नहीं है।

कब बना था शत्रु संपत्ति अधिनियम 

असल में शत्रु संपत्ति अधिनियम वर्ष 1968 में पारित हुआ था, लेकिन तब से लेकर अब तक जिला प्रशासन ने मैन्युअल सर्वे किया। कुछ जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने हाल के दिनों में भी शत्रु संपत्ति का मैन्युअल सर्वे कराया है, पर उसकी कोई प्रामाणिक रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी गई है। ऐसे में विभाग ने अब तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शत्रु भूमि का एक प्रामाणिक सर्वे कराने का फैसला लिया है। इसमें डीजीडीई सर्वे करेगी और जिला प्रशासन का कार्य बाजार मूल्य के अनुरूप भूमि की उचित कीमत का आकलन करना होगा।

अधिकांश संपत्ति पर है अवैध कब्जा

तत्कालीन स्थिति की बात करें तो भारत में अधिकांश शत्रु संपत्तियों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। तो वहीं कुछ संपत्ति को गृह मंत्रालय किराया पर चला रहा है, जिसकी किराए की दर नाममात्र है। ऐसे में गृह मंत्रालय ने शत्रु संपत्ती की नीलामी का फैसला लिया है, ताकि उस आय को देश के विकास में लगाया जा सके। नोएडा व ग्रेटर नोएडा की बात करें तो यहां कई शत्रु संपत्ति पर बिल्डर माफियाओं ने कब्जा कर वहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण कर दिया है। यहां कई परिवारों का निवेश है, ऐसी शत्रु संपत्ति को खाली कराकर उस पर गृह मंत्रालय के लिए कब्जा करना चुनौतीपूर्ण होगा।इसके साथ ही लोगों के विरोध का भी विभाग को सामना करना पड़ेगा।गाजियाबाद स्थित मोदी नगर में जिला प्रशासन ने 576 बीघा शत्रु संपत्ति को अतिक्रमणकारियों से खाली कराया है, इस पर प्रशासन को विरोध व प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है डीजीपीएस तकनीक

डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) की मदद से देशभर में रक्षा भूमि का सफल सीमांकन करने के बाद अब डीजीडीई शत्रु संपत्ति के राष्ट्रीय सर्वे के लिए भी इसी सिस्टम का इस्तेमाल करेगी।यह ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) का संवर्द्धित रूप है जो बेहतर स्थान सटीकता प्रदान करता है।

659 शत्रु संपत्ति हैं दिल्ली में

दिल्ली की बात करें तो सदर बाजार, चांदनी चौक व जामा मस्जिद में 659 शत्रु संपत्ति हैं। इसमें से अधिकांश में दुकानें चल रही है।भारत में शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन के बाद कई शत्रु संपत्ति ऐसी सामने आएगी, जिनका बाजार मूल्य एक करोड़ या उससे कम होगा। ऐसी भूमि को खरीदने का सर्वप्रथम विकल्प उन लोगों के पास होगा, जो वहां दुकान चला रहे हैं। यदि वे सक्षम हैं तो गृह मंत्रालय कानूनी रूप से वह भूमि उन्हें सौंप देगा।

क्या है शत्रु संपत्ति

ऐसे लोग जो देश के विभाजन के समय या फिर 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के बाद चीन या पाकिस्तान जाकर बस गए और उन्होंने वहां की नागरिकता ले ली हो, भारत के रक्षा अधिनियम, 1962 के तहत सरकार उनकी संपत्ति को जब्त कर सकती है और ऐसी संपत्ति के लिए अभिरक्षक या संरक्षक (कस्टोडियन) नियुक्त कर सकती है। अतः देश छोड़कर जाने वाले ऐसे लोगों की भारत में मौजूद संपत्ति शत्रु संपत्ति कहलाती है।

कहां है कितनी शत्रु संपत्ति

  • राज्य व केंद्रशासित प्रदेश मौजूद चिह्नित

  • उत्तर प्रदेश 6255            3797

  • पश्चिम बंगाल 4088            810
  • दिल्ली 659            323
  • गोआ 295            08
  • महाराष्ट्र 211            84
  • तेलंगाना 159            -
  • गुजरात 151            95
  • त्रिपुरा 105            5785
  • बिहार 94 140            
  • मध्यप्रदेश 94            125
  • छत्तीसगढ़ 78            05
  • हरियाणा 71            02
  • केरल 71            91
  • उत्तराखंड 69            68
  • तमिलनाडु 67            -
  • मेघालय 57            -
  • असम 29            -
  • कर्नाटक 24            14
  • राजस्थान 22            255
  • झारखंड 10            05
  • दमन एंड दीव 4            -
  • आंध्र प्रदेश 1            -
  • अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह 1            -
  •             
  • 12,615 11,607

Edited By: Prateek Kumar

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