नई दिल्ली [अरविंद कुमार द्विवेदी]। सप्ताहांत लाकडाउन के पहले दिन दिल्ली पुलिसकर्मी अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आए। लाकडाउन का उल्लंघन कर घरों से निकले लोगों को पुलिसकर्मियों ने कभी अभिभावक की तरह समझाया तो कभी डाक्टर की तरह कोरोना से बचने का तरीका सिखाया। किसी की मजबूरी सुनकर उनकी आंखें भर आईं तो किसी-किसी का तर्क व झूठा बहाना सुनकर वे अपनी हंसी न रोक सके। वहीं, चोरी और ऊपर से सीनाजोरी करने वालों पर कार्रवाई भी की गई। कोरोना महामारी के मुश्किल व निराशा भरे दौर में पुलिस ने पूरी मुस्तैदी से न सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाई बल्कि उसे एंज्वाय भी किया। और ऐसे ही खट्टे-मीठे अनुभवों के साथ लाकडाउन का पहला दिन कब बीत गया, उन्हें पता भी नहीं चला। दक्षिण-पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजेंद्र प्रसाद मीणा व दक्षिणी जिले के पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर दिन भर स्थिति का जायजा लेते रहे।

जीपीएस ने दिल्ली की बजाय फरीदाबाद पहुंचा दिया साहब...

एक कार चालक को पुलिस ने रोका तो उसने बताया कि वह सिविल लाइंस से अपने मालिक को आक्सीमीटर देने वसंत कुंज के शांति निकेतन जा रहा था। लेकिन जीपीएस ने उसे फरीदाबाद वाले शांति निकेतन पहुंचा दिया। सुबूत के रूप में उसने आक्सीमीटर भी दिखाया और जीपीएस का रिकार्ड भी। वहीं, जामिया नगर में सड़क पर जा रहे एक युवक का तर्क सुनकर तो पुलिसवाले भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। रोकने पर उसने पुलिस को बताया कि देश आर्थिक संकट में है साहब। इसलिए वह शराब लेने जा रहा है ताकि सरकार को टैक्स के रूप में राजस्व मिल सके। खैर, उसके खिलाफ लाकडाउन के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया गया है।

कार में सब्जी भरकर घूम रहे थे जनाब

सुखदेव विहार में एक कार चालक को रोका गया उसने कार में सब्जी से भरा थैला दिखाते हुए कहा कि वह ओखला मंडी से सब्जी लेकर लेकर घर जा रहा है। हालांकि पुलिस के सवाल दर सवाल में वह फंस गया और कुबूल कर लिया कि पुलिस को चकमा देने के लिए उसने कार में सब्जी का थैला रखा था। एक युवक ने बताया कि नवरात्र में माताजी का पाठ चल रहा था इसलिए आना उसकी मजबूरी थी। उसने कहा- पहले दिन से ही आ रहा था इसलिए कुछ भी हो आज भी मुझे आना ही था। मथुरा रोड पर एक कार सवार को रोककर पुलिसकर्मी उनसे सवाल-जवाब कर रहे थे। बुजुर्ग ने मास्क खिसकाकर कहा कि वह कोरोना पाजिटिव हैं और अस्पताल में भर्ती होने जा रहे हैं। इस पर पुलिसकर्मी ने तुरंत उन्हें जाने दिया। एक कार चालक ने कई लोगों को बैठा रखा था। रोकने पर उसकी आंखें भर आईं। बताया कि स्वजन की मौत हुई थी। मां को लेकर उनके अंतिम दर्शन कराने गया था। पुलिस ने उसे आगे से ध्यान रखने की हिदायत देकर जाने दिया।

झूठ पर झूठ तो नहीं चलेगा....

स्कूटी सवार दो युवकों को पुलिस ने रोका तो उन्होंने कहा वह पानी की बोतल सप्लाई करते हैं। पास कहां है- तो बोले बनवाने जा रहे हैं। लाकडाउन का पता नहीं था....आदि। और फिर सबसे कामन वाला सवाल... तुम दोनों के हेल्मेट कहां हैं। किनारे लगाओ गाड़ी। कालकाजी में आटा, चावल खरीदने जा रहे एक बुजुर्ग सिर्फ इसलिए भड़क गए कि पुलिस वाले उनका वीडियो क्यों बना रहे हैं।झगड़ने लगे और आखिरकार चालान कटवाकर ही माने।

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