नई दिल्ली, आशीष गुप्ता। दिल्ली दंगे के दौरान सोना, चांदी और नकदी की लूट कर दुकान में आग लगाने के मामले में बुधवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपित राशिद की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह कहते हुए कि आरोपित सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहा है। उसके हाथ में डंडा है, जिससे दंगे में उसकी सक्रियता प्रतीत होती है। उस पर गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं, ज्योतिनगर इलाके में हुई हिंसा के मामले में घटनास्थल का वीडियो फुटेज न होने पर आरोपित दीपक तोमर को कोर्ट ने जमानत दी है।

गत 24 फरवरी को दयालपुर इलाके में चमन पार्क मुख्य बृजपुरी रोड गली नंबर-एक में आभूषण की दुकान में लूटपाट के बाद आग लगा दी गई थी। इस मामले में आरोपित राशिद उर्फ राजा की जमानत अर्जी पर बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दलील देते हुए कहा कि राशिद को झूठे केस में फंसाया गया है। जिस क्षेत्र में हिंसा हुई, वहीं करीब में उसकी हार्डवेयर की दुकान थी। उसने आत्मरक्षा के लिए हाथ में डंडा लिया हुआ था।

अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि दंगा स्थल पर आरोपित दंगाई भीड़ के बीच मौजूद था। उसकी मुद्रा आक्रामक थी। यह भी बताया कि दंगे से जुड़े दस मामलों में आरोपित का नाम है। उसकी मूल गिरफ्तारी दिलबर नेगी हत्या मामले में हुई थी। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील को तथ्यात्मक मानते हुए आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

आदेश में कहा कि आरोपित और गवाह एक क्षेत्र में रहते हैं। आरोपित को जमानत देना इसलिए भी उचित नहीं है। वह बाहर निकल कर गवाहों को डरा-धमका सकता है। वहीं ज्योतिनगर इलाके में दंगे के दौरान गत वर्ष 25 फरवरी को कर्दमपुरी पुलिया के पास एक व्यक्ति पर हमला करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट ने आरोपित दीपक तोमर को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। कोर्ट ने आदेश में कहा कि सीसीटीवी फुटेज घटना स्थल की नहीं है।

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