नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यकारी कुलसचिव नियुक्ति विवाद फिलहाल अभी शांत होने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार को कुलपति द्वारा कार्यकारी कुलसचिव नियुक्त प्रो पीसी झा ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों, डीन ऑफ कॉलेज को एक पत्र लिखा। जिसमें उन्होने डीयू एक्ट 1922 में निहित कुलपति की शक्तियों का हवाला देते हुए अपनी नियुक्ति को जायज ठहराया। पत्र में कहा गया है कि कॉलेजों को प्रो पीसी झा के आदेश का पालन करना चाहिए। प्रो पीसी झा का यह पत्र कार्यकारी परिषद द्वारा नियुक्त कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता के कारण बताओ नोटिस के एक दिन बाद आया है। डॉ विकास गुप्ता ने शनिवार को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रो पीसी झा का नियुक्ति विवाद पर स्पष्टीकरण मांगा था।

कुलपति को मिला चांसलर नॉमिनी का साथ

नियुक्ति को लेकर चल रही उठापटक के बीच कुलपति को डीयू के चांसलर नॉमिनी प्रो राजकुमार भाटिया का साथ मिला है। प्रो राजकुमार भाटिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कुलपति की तबियत जरुर खराब थी लेकिन ठीक होने के बाद उन्होने अपना कार्यभार सम्हाल लिया था। ऐसा कोई नियम नहीं है कि कुलपति को बीमारी से ठीक होने के बाद दोबारा ज्वाइन करने के लिए सर्टिफिकेट देना पड़े। बीमारी के दौरान भी वीसी का अधिकार बकरार रहता है। प्रो भाटिया ने कहा कि पूरे प्रकरण में मंत्रालय ने अनधिकृत तरीके से हस्तक्षेप किया है। विवि में मंत्रालय की भूमिका और हस्तक्षेप में अंतर होता है। मंत्रालय सलाह दे सकता है लेकिन आदेश नहीं।

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