नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली नगर निगम में पार्षदों के शपथ ग्रहण के बाद महापौर चुनाव से पहले सदन की बैठक नाटकीय ढंग से स्थगित हुई़़। बुधवार को शपथ ग्रहण जैसे जैसे अपने आखिरी चरण की और बढ़ा रहा था, वैसे-वैसे सदन में शोर बढ़ रहा था।

पीठसीन अधिकारी ने जब अचानक बैठक स्थगित करने की बात कही तो भाजपा व कांग्रेस पार्षद इस गति से सदन से बाहर निकले जैसे उन्हें पहले से इसका अंदेशा था, वहीं आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद इसे जब तक समझ पाते तब तक स्थिति बदल चुकी थी। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बदली और सदन से बाहर जाने के बजाय वहीं पर अनिश्चकालीन धरने का एलान कर दिया।

सदन में ही धरना शुरू हुआ तो लगा कि यह धरना कई दिनों तक चलेगा, लेकिन आप नेताओं ने अचानक देर शाम धरना खत्म कर दिया। जिसके पीछे बड़ी वजह गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित बात कही गई।

अरविंद केजरीवाल ने 2014 में दिया था धरना

वर्ष 2014 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रेल भवन के पास दिल्ली पुलिस को अधीन लाने के लिए धरना दिया था। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले हुए इस धरने की आलोचना इसलिए भी हुई थी, क्योंकि गणतंत्र दिवस की परेड के मद्देनजर सुरक्षा की दृष्ठि से सबसे संवेदनशील क्षेत्र था। इसके बाद 2018 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ तीन और मंत्रियों ने करीब एक सप्ताह तक धरना दिया था। ऐसे में जब सिविक सेंटर में आप नेताओं का धरना शुरू हुआ तो अंदाजा लगाया जा रहा था कि यह लंबा चलेगा।

अनिश्चित कालीन धरने पर बैठने की थी प्लानिंग

आप नेताओं ने सदन से कई बार यह बात भी कही कि जब तक एलजी महापौर का चुनाव नहीं करा देते तब तक वह यहीं धरने पर बैठे रहेंगे, लेकिन आप नेताओं ने रणनीति तब बदली जब उन्हें पता चला कि सिविक सेंटर सुरक्षा के मद्देनजर बृहस्पतिवार दोपहर में सील हो जाएगा। ऐसे में अगर, धरना जारी रहता तो संभवत: सुरक्षा कर्मियों को बल प्रयोग कर सिविक सेंटर को सील करना पड़ता। क्योंकि 28 मंजिला सिविक सेंटर दिल्ली की सबसे ऊंची इमारत हैं। यहां से पुरानी दिल्ली और लाल किला बहुत नजदीक है। चूंकि गणतंत्र दिवस की परेड दिल्ली गेट होकर लाल किला जाती है तो इसको लेकर सुरक्षा एजेंसिया किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं ले सकती थीं।

Edited By: Abhi Malviya

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