नई दिल्ली (जेएनएन)। पंजाब में खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) को दोबारा से खड़ा करने के लिए आतंकी गुरसेवक फंड जुटा रहा था। वह पाकिस्तान में बैठे केसीएफ चीफ परमजीत सिंह समेत कई आतंकियों के संपर्क में था। आर्थिक समस्या के कारण ही गुरसेवक ने लूट व डकैती की वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया था।

तेजी से फंड जुटाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के अपराधियों से भी हाथ मिला लिया था। क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गुरसेवक ने 1986 में पंजाब में एक साथ 19 शराब की दुकानों में पिस्टल के बल पर 36 लाख से अधिक की लूट की थी।

पिछले पांच साल से वह लूट व डकैती की कई वारदात में शामिल रहा था। लुधियाना पुलिस ने उसे 2014, 2015 व 2016 में गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह दिल्ली-एनसीआर के आधा दर्जन गैंग के संपर्क में था और कई बार दिल्ली आ चुका था। उसकी दिल्ली में बढ़ी गतिविधियों के कारण ही क्राइम ब्रांच ने आखिरकार उसे दबोच लिया।

गुरसेवक पाकिस्तान में बैठे केसीएफ चीफ आतंकी परमजीत सिंह पंजवाड़ व पूर्व केसीएफ चीफ आतंकी जगतार सिंह हावरा के संपर्क में था। दोनों आतंकियों के साथ मिलकर वह पंजाब में दोबारा से केसीएफ को खड़ा करने की कोशिश में था। युवाओं को बरगलाकर संगठन से जोड़ना चाह रहा था।

गुरसेवक ने 1986 में पंजाब में आतंकियों पर सख्त कार्रवाई करने वाले पूर्व डीजीपी जूलियो रिबेरियो पर हमला किया और साथियों के साथ आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसे पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और तबसे 2004 तक तिहाड़ जेल में रहा।

तिहाड़ से उसने केसीएफ सरगना परमजीत सिंह पंजवाड़ से फोन पर संपर्क किया और उससे दिल्ली में वारदात के लिए बड़े पैमाने पर विस्फोटक व एके-47 भेजने की बात कही थी। बातचीत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने 9 जुलाई 1998 को दो आतंकियों को पंजाबी बाग से 18 किलो आरडीएक्स, एक एके-47, 100 कारतूस, 5 कारतूस और 8 हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया था।

पंजाब पुलिस वर्ष 2004 में जब उसे तीस हजारी कोर्ट में पेश करने जा रही थी, तब वह फरार हो गया था। एक हफ्ते बाद लुधियाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इसके बाद वह 2010 तक जेल में रहा। 2010 में जमानत पर बाहर आने के बाद अदालत में पेश नहीं हुआ। वह बार-बार घर बदलता रहा।

पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे घोषित अपराधी घोषित किया। कर दिया पर वह अपनी आदतों से बाज नहीं आया और वारदात को अंजाम देता रहा। लुधियाना पुलिस ने उसे 2014, 2015 व 2016 में अलग-अलग मामलों में पकड़ा था।

Posted By: JP Yadav

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