नई दिल्ली [धनंजय मिश्रा]। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो कर्ज दिलाने के नाम पर ठगी करता था। मामले में क्राइम ब्रांच ने दंपती समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। कोरोना संक्रमण के कारण दंपती का काम छूट गया था। ऐसे में दंपती ने पैसा कमाने के लिए ठगी करने की योजना बनाई। गिरफ्तार आरोपितों में यूपी के बुलंदशहर के खुर्जा निवासी गीता चौहान (27) व जितेंद्र सिंह (28) हैं। मामले में क्राइम ब्रांच ने गीता के पति पुष्पेंद्र व एक अन्य आरोपित हरीश बघेल को करीब दो माह पहले गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके पास से एक लैपटाप, तीन मोबाइल व कई सिमकार्ड बरामद किए हैं। इस गिरोह ने दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, समेत कई राज्यों के सैंकड़ों लोगों से ठगी की है। आरोपित गूगल पर नामी वित्तीय संस्था का विज्ञापन देकर कर्ज देने का झांसा देते थे। कुछ मामलों में आरोपित गीता ने हनी ट्रेप के जरिये पीड़ितों से ठगी की है।

क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त आयुक्त शिबेश सिंह के मुताबिक, गत वर्ष मई में सब्जी मंडी निवासी कारोबारी पंकज कुमार ने 13.50 लाख रुपये ठगी की शिकायत दी थी। बताया गया कि गूगल पर कारोबार के कर्ज का विज्ञापन देखकर दिए गए नंबर पर संपर्क किया। आरोपित ने खुद को एक नामी वित्तीय संस्था का प्रतिनिधी बताकर उसे कर्ज देने का भरोसा दिया इसके बाद आरोपित के वाट्स एप पर पीडि़त ने दस्तावेज आदि भेजे। एक दो दिन बाद आरोपित ने उन्हें 45 लाख रुपये का चेक वाट्स एप भेजा और कहा उनका कर्ज पास हो गया। लेकिन चेक भेजने से पहले उन्हें प्रोसे¨सग शुल्क देना होगा। आरोप है कि अलग-अलग वजह बता कर पीडि़त से 13.50 लाख रुपये ठग लिए गए। शुरुआती जांच में पुलिस ने पहले खुर्जा से गत वर्ष अक्टूबर और नवंबर में पुष्पेंद्र व हरीश बघेल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि इस पूरे गिरोह की सरगना पुष्पेंद्र की पत्नी गीता है। इसके बाद खुर्जा से 13 व 15 जनवरी को जितेंद्र व गीता को गिरफ्तार कर लिया गया।

ब्यूटीशियन से बनी शातिर ठग

पूछताछ में गीता ने बताया कि 13 साल पहले उसकी पुष्पेंद्र से शादी हुई थी। वह खुर्जा में ही ब्यूटी पार्लर चलाती थी। वहीं पुष्पेंद्र निजी कंपनी में नौकरी करता था। कोरोना के चलते दोनों का काम छूट गया था। ऐसे में गीता ने ठगी की योजना बनाई। इसके लिए उसने अपने गिरोह में जितेंद्र और हरीश को शामिल किया। यह दोनों ठगी के पैसे जमा करने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करते थे। पुलिस जांच में पता चला है कि जब पीडि़त मांग पर पैसे नहीं देते थे तो गीता पीड़ितों को हनी ट्रैप में फंसाने की धमकी देकर ठगी करती थी।

Edited By: Mangal Yadav