नई दिल्ली, जेएनएन।  मेट्रो में टोकन वितरण व साफ-सफाई के लिए तो पहले भी ठेके पर कर्मचारी नियुक्त होते रहे हैं, लेकिन अब दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने मेट्रो परिचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी भी निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस क्रम में रेड लाइन (रिठाला-दिलशाद गार्डन) व येलो लाइन (समयपुर बादली-हुडा सिटी सेंटर) पर परिचालन निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इसके तहत डीएमआरसी निजी कंपनियों से ठेके पर ट्रेन ऑपरेटरों (चालक) को आउटसोर्स करेगा। ठेके पर नियुक्त चालक इन दोनों कॉरिडोर पर मेट्रो ट्रेन चलाएंगे। इसका मकसद परिचालन के खर्च में कटौती व बचत करना है।

हालांकि इस फैसले से मेट्रो के कर्मचारियों में नाराजगी है। मेट्रो स्टाफ काउंसिल के सदस्यों का कहना है कि ठेके पर नियुक्त चालकों के हाथ में मेट्रो परिचालन की जिम्मेदारी देने से यात्रियों की सुरक्षा को खतरा होगा। वहीं, डीएमआरसी ने इस आरोप को खारिज किया है। डीएमआरसी का कहना है कि मौजूदा समय में चालक व ट्रेनों की रखरखाव से संबंधित कर्मचारी स्थायी हैं।

इससे कर्मचारियों के वेतन पर भारी भरकम खर्च आता है। चालकों का वेतनमान कार्यकारी रैंक के अधिकारियों के बराबर है। फेज-4 की नई मेट्रो लाइनों का निर्माण होने पर परिचालन का खर्च और बढ़ जाएगा। इसलिए, रेड लाइन व पिंक लाइन की मेट्रो के लिए आउटसोर्सिग से चालक नियुक्त किए जाएंगे।

इसके लिए डीएमआरसी ने टेंडर जारी किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार डीएमआरसी 51 महीने (चार साल तीन माह) के लिए किसी निजी कंपनी को मेट्रो परिचालन की जिम्मेदारी देगा। वह कंपनी मेट्रो में ठेके पर चालकों की नियुक्ति करेगी। नियुक्ति के बाद करीब तीन महीने तक डीएमआरसी अपने ट्रेनिंग स्कूल में उन्हें मेट्रो चलाने का प्रशिक्षण देगा। इसके बाद डीएमआरसी की निगरानी में ही वे मेट्रो का परिचालन करेंगे।

निर्धारित अवधि के दौरान रेड लाइन पर मेट्रो परिचालन के लिए डीएमआरसी निजी कंपनी को 19.64 करोड़ व येलो लाइन के लिए 29.95 करोड़ रुपये भुगतान करेगा। इन दोनों मेट्रो लाइन पर पहले से डीएमआरसी द्वारा नियुक्त स्थायी चालक अपनी सेवाएं देते रहेंगे।

चेन्नई में आउटसोर्स ऑपरेटर ही चलाते हैं मेट्रो

डीएमआरसी का कहना है कि चेन्नई में आउटसोर्स किए गए ऑपरेटर ही मेट्रो चलाते हैं। इसके अलावा केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने देश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की जो नीति तैयार की है, उसके तहत मेट्रो परिचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी निजी हाथों में देने का प्रावधान किया गया है, ताकि परिचालन का खर्च कम किया जा सके और यात्रियों पर उसका बोझ न पड़े।