नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सीवर के अंदर जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दो लोगों की मौत की घटना को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अहम टिप्पणी की है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि देश की आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी सफाई कर्मचारी मैनुअल तरीके से सीवर की सफाई करने को मजबूर हैं। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत (Supreme Court) के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी इससे जुड़े नियमों का अनुपालन नहीं हो रहा है।

मृतकों के परविार को 10-10 लाख मुआवजा

उक्त टिप्पणी करते हुए अदालत ने हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को पीड़ित परिवार को दस-दस लाख रुपये का मुआवजा के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का निर्देश दिया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा निर्धारित समयावधि में आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो डीडीए उपाध्यक्ष को अदालत में पेश करना होगा। मामले में अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।

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हाई कोर्ट ने घटना पर जताया दुख

पिछली सुनवाई पर अदालत ने दो कर्मचारियों की मौत की घटना पर दुख जताते हुए कहा था कि कानून होने के बावजूद सफाईकर्मियों के माध्यम से सफाई का काम जारी है। मामला एक सफाईकर्मी की मौत से संबंधित है और सभी कानूनों के बावजूद उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया।

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने पीठ को सूचित किया था कि वर्ष 2012 और 2017 के दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की मौत के 800 से अधिक मामले थे। अखबार में प्रकाशित खबर पर घटना का स्वत: संज्ञान लेकर हाई कोर्ट ने जनहित याचिका शुरू की थी।

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दिल्ली के मुंडका में हुई थी घटना

बता दें कि बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में नौ सितंबर को एक सफाईकर्मी और एक सुरक्षा गार्ड की सीवर में जहरीली गैस के कारण मौत हो गई थी। पुलिस ने कहा था कि जब सफाईकर्मी सीवर साफ करने के लिए नीचे गया तो वह बेहोश हो गया और गार्ड ने उसे बचाने के लिए नीचे गया और वह भी बाहर नहीं निकला। काफी देर बीत जाने के बाद दोनों को बाहर निकाला गया। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। पिछली सुनवाई पर दिल्ली जल बोर्ड ने पीठ को सूचित किया था कि घटनास्थल डीडीए के क्षेत्राधिकार में हुआ था और कर्मचारी भी डीडीए के थे।

Edited By: Aditi Choudhary

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