नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। आपराधिक घटनाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि हमें ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे कि इस तरह की घटना दोबारा न हो और सड़क आम नागरिकों के साथ विशेष तौर पर महिलाओं व बच्चों के लिए सुरक्षित हों। न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने कहा कि मुंबई यह कर चुकी है। मुंबई में महिलाएं सुरक्षित हैं और हमें भी यह करना होगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास स्नोत और मैनपावर (मानव शक्ति) की कमी है।

पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अंधेरे व खराब रोशनी वाले इलाके लोगों के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। पीठ ने इन टिप्पणियों के साथ टाटा पॉवर दिल्ली पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) व उत्तरी दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया कि वे ऐसे स्थानों को चिह्न्ति करें और वहां प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। पीठ ने इसके साथ ही एनर्जी एफिसेंट सिस्टम लिमिटेड (ईईसीएल) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई (29 नवंबर) पर अपना प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया।

दिसंबर 2012 में वसंत विहार इलाके में युवती के साथ चलती बस में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद दायर की गई जनहित याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही है। इस मामले में अदालत मित्र अधिवक्ता मीरा भाटिया ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2017 में पीठ ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने व निगरानी रखने के लिए कमेटी बनाने को कहा था। उन्होंने मांग की कि उक्त कमेटी को रिपोर्ट पेश करनी चाहिए कि क्या काम हुआ। इस पर पीठ ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट पेश करके बताए कि उसने इस दिशा में क्या कदम उठाया।

दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा व एडिशनल स्टैंडिंग काउंसल अनुज अग्रवाल ने पीठ को बताया कि दो पुलिस स्टेशनों को छोड़कर बाकी सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरा लगा लिए गए हैं और सभी काम कर रहे हैं। अन्य दो पुलिस स्टेशनों में भी जल्द सीसीटीवी कैमरे लगा दिए जाएंगे। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पहले भी अपराध व असुरक्षित इलाकों में पुलिस अफसरों की संख्या बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया था।

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Posted By: JP Yadav

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