नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। राजधानी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में जारी ऑक्सीजन संकट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई जारी है। दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की एक बेंच लगभग रोजाना अस्पतालों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में अस्पताल जीवन की सुरक्षा के मूलभत अधिकार के आधार पर ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार का कहना है कि उसे अस्पतालों के लिए रोजाना 976 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, लेकिन मिल रही है सिर्फ 490 टन। केंद्र सरकार ने यह सीमा तय की है, हालांकि, दिल्ली सरकार के वकील ने बुधवार को सुनवाई के दौरान ऑक्सीजन कोटे में बढ़ोतरी की बात स्वीकार की है।

उधर, मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान ऑक्सीजन की सप्लाई का प्रबंधन देख रहे केंद्रीय अधिकारियों ने कोर्ट से कहा है कि वे अपना हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज विपिन सांघी और रेखा पल्ली ने अदालत में केंद्र और दिल्ली सरकार के वकीलों की बहस सुनी जिसमें ऑक्सीजन कोटा, परिवहन की समस्या और टैंकरों की कमी जैसे तर्क दिए गए। बता दें कि सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखी टिप्पणी कर चुका है।