नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। बिना आधार व नोटिस के तलाक दिए जाने के प्रविधान को चुनौती देने वाली मुस्लिम महिला की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि हमें याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं दिखाई देता है और इससे संबंधित कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है। 28 वर्षीय मुस्लिम महिला ने अधिवक्ता बजरंग वत्स के माध्यम से याचिका दायर कर कहा था कि यह प्रविधान परंपरा मनमाना, शरिया काननू विरोधी, असंवैधानिक, स्वेच्छाचारी और बर्बर है। यह पुरुषों को एकतरफा अधिकार देता है।

उन्होंने शरिया कानून का उल्लंघन करने वाली इस परंपरा को समाप्त करने और दिशानिर्देश बनाने की मांग की थी। याचिका के अनुसार महिला के पति ने आठ अगस्त को तलाक देकर उन्हें छोड़ दिया है। इसके बाद उन्होंने पति को कानूनी नोटिस भेजा था।

उधर दक्षिणी दिल्ली के कापसहेड़ा थाना क्षेत्र से तीन साल पहले महिला और उसका चार साल का बच्चा लापता हुआ था, जिसकी शिकायत दर्ज करवाई गई थी। लगातार लापता हो रहे बच्चों की तलाश में दक्षिण-पूर्वी जिले के एसआइ जनक सिंह और एएसआइ मनोज की टीम बनाई गई। पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा ने बताया कि इन तीन साल में गुमशुदा महिला और उसके बच्चे का डोर टू डोर वेरिफिकेशन किया गया।

पुलिसकर्मियों ने जिपनेट पर लापता बच्चों के बारे में अधिकतम उपलब्ध जानकारी साझा की। पुलिस ने उनके मोबाइल नंबर का पता लगाने के लिए गूगल मैपिंग का भी इस्तेमाल किया। आखिरकार, महिला और उसके बच्चे को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से ढूंढ़ निकाला। एएचटीयू टीम ने महिला एवं बाल विकास आयोग की टीम की मौजूदगी में दोनों को स्वजन के सुपुर्द कर दिया।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari