नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। Booster Dose in India : कोरोना महामारी के लिए दोनों टीका लगवाने वालों को बूस्टर खुराक देने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि रूढ़िवादी होने के कारण हम दूसरी लहर जैसी स्थिति दोबारा नहीं चाहते हैं। पीठ ने कहा कि जहां पश्चिमी देश बूस्टर खुराक देने की वकालत कर रहे हैं। वहीं, भारतीय विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इसका समर्थन करने के लिए कोई चिकित्सा साक्ष्य नहीं है। मामले में आगे की सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। 

पश्चिम देश बूस्टर डोज को कर रहा प्रोत्साहित

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान दाखिल की गई विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर बात है। हम विशेषज्ञ नहीं हैं, लेकिन यह कैसे है कि पश्चिम देश बूस्टर को प्रोत्साहित कर रहा है और हम उन लोगों को भी अनुमति नहीं दे रहे हैं जो इसे चाहते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि टीका लगवाने वाले व्यक्ति में एंटीबाडी का स्तर कुछ समय बाद कम हो जाता है।

कोर्ट ने पूछा आगे का रास्ता क्या है

पीठ ने पूछा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आइसीएमआर) क्या कह रहा है, उनका क्या स्टैंड है? यदि नहीं, तो कुछ आधार होना चाहिए। यदि यह आवश्यक हो, तो आगे का रास्ता क्या है? पीठ यह भी पूछा कि जो टीके समाप्त होने वाले हैं, उन्हें पूरी तरह से टीका लगाने वालों को बूस्टर खुराक के रूप में क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वैक्सीन की बूस्टर खुराक देने और इसे रोल आउट करने के प्रस्ताव की समय सीमा के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

बच्चों के टीकाकरण पर भी पूछा सवाल

पीठ ने साथ ही केंद्र से बच्चों के टीकाकरण पर भी अपना पक्ष रिकार्ड पर लाने काे कहा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अनुराग अहलूवालिया ने पीठ को बताया कि यह मुद्दा पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की अदालत में लंबित है। इस संबंध में केंद्र ने एक हलफनामा दायर कर बताया है कि बच्चों के टीकाकरण को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और परीक्षण जारी है।

बूस्टर डोज पर हुई नीति की बात

इस पर पीठ ने कहा ये जानकारी यहां भी पेश करें। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राज शेखर राव ने कहा कि बूस्टर खुराक की दक्षता विशेषज्ञ की राय का विषय है और केंद्र को इस पर एक नीति के साथ आना चाहिए। वहीं, दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि सही चीजें सही समय पर की जानी चाहिए।

Edited By: Prateek Kumar