नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। ऑक्सीजन की जमाखाेरी के आरोपों को खारिज करने और किराये के सिलेंडर को हरियाणा के फरीदाबाद से भरवाने के कैबिनेट मंत्री इमरान हुसैन के दावे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने इमरान हुसैन को निर्देश दिया कि अपने दावे से जुड़े दस्तावेज अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव के समक्ष पेश करें। अदालत मित्र उक्त दस्तावेजों को सत्यापित करेंगे। साथ ही दिल्ली सरकार को हलफनामा दायर करके बताने को कहा कि इमरान हुसैन को दिल्ली के ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं से ऑक्सीजन दी जा रही थी या नहीं। पीठ ने उक्त निर्देशों के साथ सुनवाई 13 मई तक के लिए स्थगित कर दी।

सुनवाई के दौरान पीठ के सात मई के आदेश पर इमरान हुसैन अदालत के समक्ष पेश हुए। इमरान की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि इमरान हुसैन ने दिल्ली से तीन सिलेंडर किराये पर लिए और उसे फरीदाबाद से भरवा कर जरूरतमंदों की मदद की जा रही है। पीठ ने जब ऑक्सीजन प्राप्त करने का स्रोत पूछा तो विकास पाहवा ने कहा कि इससे जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे। पीठ ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपने 22 पेज का जवाब दाखिल किया है, लेकिन इससे जुड़ा कोई भी दस्तावेज क्यों नहीं दिया गया। हालांकि, पीठ ने कहा कि अगर आप दिल्ली के आपूर्तिकर्ताओं के बजाए अन्य स्रोत से ऑक्सीजन हासिल करके दिल्ली की आपूर्ति को बढ़ाने की कोशिश कर रहे तो हमें इसमें आपत्ति नहीं है।

वहीं,याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता अमित तिवारी ने कहा कि अगर ये गलत नहीं है तो फिर उन्होंने फेसबुक पोस्ट को क्यों हटा दिया और वितरण क्यों बंद कर दिया। एक अन्य याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विराग गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के नेता आक्सीजन से लेकर दवाओं को प्राप्त करके बांट रहे हैं। पीठ ने कहा कि जहां तक ऑक्सीजन का सवाल है इसे खरीदने पर प्रतिबंध नहीं है। पीठ ने कहा कि अगर यह आवंटित आपूर्ति से नहीं ले रहे हैं तो वे समाज की सेवा कर रहे हैं। सात मई को हुई सुनवाई के दौरान अमित तिवारी ने पीठ के समक्ष फेसबुक पर डाली गई पोस्ट को दिखाते हुए कहा था कि इस पोस्ट को आम आदमी पार्टी के वेरिफाइड एकाउंट से पोस्ट किया गया। यह पोस्ट दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन द्वारा ऑक्सीजन वितरण के संबंध में किया गया है।

उन्होंने कहा कि राजनेताओं द्वारा ऑक्सीजन की जमाखोरी की जा रही है और इस मामले की जांच होनी चाहिए कि उन्हें ऑक्सीजन कहां से मिल रहा है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसल राहुल मेहरा ने कहा था कि इस तरह की जानकारी मिलने पर आम नागरिक को स्थानीय पुलिस के पास जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि एक बात साफ है कि ऑक्सीजन ही नहीं दवाओं व इंजेक्शन की जमाखोरी व कालाबाजारी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।