नई दिल्ली, पीटीआई। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अधिकारियों से शहर की सड़कों से घूम रही गायों को हटाने के संबंध में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रखने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर गायों की मौजूदगी पर एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका पर कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि इस मुद्दे पर अधिकारियों द्वारा कदम उठाए जा रहे थे।

दिशा-निर्देशों के पालन पर बोले जस्टिस

चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि यदि इस मुद्दे पर पहले के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो अवमानना ​​​​कार्रवाई के लिए एक याचिका दायर की जानी चाहिए, न कि एक नई जनहित याचिका दायर हो।

पीठ में शामिल जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "कोई और आदेश नहीं मांगा गया है। राज्य स्थिति की निगरानी करता रहेगा और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा।" दिल्ली नगर निगम के वकील ने प्रस्तुत किया कि वह गौशाला में मवेशियों को भेजने और हर महीने स्थिति की समीक्षा करने सहित उचित कार्रवाई कर रहा है।

सड़कों पर गायों की मौजूदगी से दिक्कत

यह भी कहा गया कि अवैध डेयरियों को नोटिस जारी किए गए हैं। याचिकाकर्ता फ़राज़ खान ने तर्क दिया कि सड़कों पर गायों की उपस्थिति बड़े पैमाने पर जनता के लिए मुश्किलें पैदा करती है क्योंकि वाहनों के मालिकों के लिए इससे गुजरना मुश्किल हो जाता है और इससे दुर्घटनाएं और ट्रैफिक जाम भी होता है।

कहा गया कि गाय मालिक, गायों को दुहने के बाद उन्हें सड़क पर स्वतंत्र रूप से घूमने छोड़ देते हैं। वे सड़कों और गलियों में कचरा, गोबर और अन्य गंदी चीजें फैलाते हैं और ये गंदी चीजें खराब गंध देती हैं। कई बार गायें भारी वाहनों से टकरा जाती हैं और घायल हो जाती हैं।

वाहन से गायों की हो जाती है टक्कर

यहां तक कई बार देखा जाता है कि वाहन से टक्कर में वाहन चालक चोटिस हो जाते हैं या फिर गायें चोटिल हो जाती हैं। याचिका में सड़कों से गायों को हटाने की मांग के अलावा अधिकारियों को आश्रय देने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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Edited By: Shyamji Tiwari

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