विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अस्पतालों की बढ़ाई जाएगी सुरक्षा, बदमाश अब नहीं लगा पाएंगे सेंध; दिल्ली सरकार ने बदल दिया तरीका

Published: Mon, 15 Jul 2024 07:15 PM (IST)

जीटीबी अस्पताल में एक मरीज की गोली मारकर हत्या की घटना के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआइएमए) ...और पढ़ें

दिल्ली के अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर मंत्री सौरभ भारद्वाज ने की समीक्षा बैठक।
दिल्ली के अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर मंत्री सौरभ भारद्वाज ने की समीक्षा बैठक।

HighLights

  1. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक में दिल्ली सरकार ने किया फैसला
  2. सभी बड़े अस्पतालों की इमरजेंसी गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाने और दो बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड तैनात करने का निर्णय

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। जीटीबी अस्पताल में एक मरीज की गोली मारकर हत्या की घटना के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) के पदाधिकारियों ने दिल्ली सरकार के सक्षम अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सभी बड़े अस्पतालों की इमरजेंसी गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाने और दो बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड तैनात करने का फैसला किया है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी है। मौजूदा समय में सभी अस्पतालों में सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या निजी सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। लेकिन अभी अस्पतालों में बंदूकधारी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एफएआईएमए के पदाधिकारियों के साथ बैठक में छह फैसले लिए गए हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त से अस्पतालों में पुलिस का एक जवान 24 घंटे तैनात करने के लिए अनुरोध किया जाएगा।

सीसीटीवी कैमरे की रखरखाव बेहतर किया जाएगा

इसके अलावा अस्पतालों के मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। मौजूदा कानून के मुताबिक मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी कैमरे की रखरखाव बेहतर किया जाएगा और नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस बैठक में एफएआइएमए के चेयरमैन डॉ. रोहन कृष्णन और मुख्य सलाहकार डॉ. मनीष जांगड़ा शामिल हुए।

बहरहाल, दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी के पास पुलिस का एक कमरा होता है। जहां एक से दो पुलिस के कांस्टेबल हमेशा मौजूद रहते हैं, जो आपराधिक घटनाओं में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों की रिपोर्ट थाने को देते हैं। इसके अलावा दिल्ली के कुछ बड़े अस्पतालों में पुलिस चौकी भी पहले से मौजूद है। जिसका काम मारपीट व आपराधिक मामलों को दर्ज कर जांच करने तक सीमित है।

यह भी पढ़ें- Delhi GTB Hospital Firing: रियाजुद्दीन की हत्या मामले में बड़ा खुलासा, टी-शर्ट और हाफ पेंट में आया था बदमाश; पुलिस के हाथ लगा ये सबूत