नई दिल्ली (प्रेट्र)। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि यमुना के पानी पर हरियाणा से बात चल रही है, लिहाजा फिलहाल कोई आदेश जारी न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तक स्थगित कर दी। मामले में दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

बोर्ड का कहना था कि समझौते के तहत हरियाणा ने दिल्ली को रोजाना 450 क्यूसेक पानी देना है, लेकिन पिछले कुछ अर्से से दिल्ली को केवल 330 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है। एक तिहाई पानी की कटौती होने से दिल्ली के लिए परेशानी पैदा हो रही है।

बोर्ड का कहना है कि वजीराबाद जल भंडार गृह में पानी का स्तर कम होने से समस्या विकराल होती जा रही है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ेगी तो समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाएगी।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने सोमवार को मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिल्ली व हरियाणा सरकार के बीच पानी को लेकर बात चल रही है। सोमवार को यमुना से कुछ पानी दिल्ली को दिया भी गया है, इसलिए अदालत फिलहाल कोई सख्त आदेश जारी न करे।

चीफ जस्टिस की बेंच ने उनके आग्रह को मानते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को कहा था कि उसे 2014 के समझौते पर कायम रहना चाहिए। इसके तहत पानी की तय मात्रा रोजाना दिल्ली के लिए यमुना से मिलनी है।

 

Posted By: JP Yadav

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस