नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। Delhi Earthquake Updates: लॉकडाउन के साथ-साथ अनलॉक के दौरान भी दिल्ली-एनसीआर में बार-बार आए भूकंप के झटकों ने सरकारी एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। आलम यह है कि दिल्ली की इमारतों को भूकंपरोधी बनाने की कवायद तेज हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High  Court) की सख्ती पर ही सही, लेकिन भूकंप के झटके नहीं झेल सकने वाली इमारतों की न सिर्फ सूची बना ली गई है, बल्कि उन्हें नोटिस भी भेजे जा रहे हैं।  बता दें कि अप्रैल से लेकर अब तक दिल्ली-एनसीआर तकरीबन 20 बार भूकंप के झटके लग चुके हैं। ऐसे में लोगों के साथ भू वैज्ञानिक भी चिंतित हैं, क्योंकि इससे पहले इतने कम समय में इतने अधिक भूकंप के झटके नहीं लगे हैं।

भूकंप नहीं झेल पाने वालों की सूची में शॉपिंग मॉल भी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (Delhi Development Authority) ने राजधानी दिल्ली की तीन सौ ऐसी इमारतों की सूची तैयार की है, जो तेज भूकंप के झटके नहीं झेल पाएंगी। इन इमारतों में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी भी हैं और बड़ी-बड़ी व्यावसायिक इमारतें एवं शॉपिंग मॉल भी हैं। यह सभी इमारतें 21 मार्च 2001 से पूर्व की बनी हुई हैं। इसके बावजूद इनका सुरक्षा सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया। यही नहीं भूकंप रोधी बनाने की दिशा में कोई रेट्रोफिटिंग भी नहीं हुई है। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर डीडीए इन सभी इमारतों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इस बाबत मंगलवार तक 64 नोटिस भेजे जा चुके हैं। इसमें इमारत की संवेदनशीलता के बारे में बताते हुए किसी भी मान्यता प्राप्त सरकारी संस्थान के स्ट्रक्चरल इंजीनियर से उसका सुरक्षा ऑडिट कराने के लिए कहा गया है। इसमें देखा जाएगा कि इमारत कहां से कितनी मजबूत और कितनी कमजोर है। ऑडिट में इमारत की खामियां दूर करने के लिए जो सुझाव दिए जाएंगे, उन पर भी अमल करना अनिवार्य होगा। इस पर जो भी खर्च आएगा उसे इमारत के प्रबंधन द्वारा ही वहन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 21 मार्च 2001 से पूर्व की बनी हुई इन इमारतों का न ही अब तक कोई सुरक्षा ऑडिट हुआ है और न ही इन्हें भूकंपरोधी बनाने की दिशा में कोई प्रयास किए गए हैं।

कानूनी कार्रवाई का भी होगा प्रावधान

अधिकारियों के मुताबिक यह सारी प्रक्रिया छह माह में पूरी की जानी है, लेकिन एक महीने के भीतर संबंधित इमारत के प्रबंधन द्वारा डीडीए को इस आशय की सूचना देनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट और उसके आधार पर कराए गए सुधार की जानकारी डीडीए के उप निदेशक (भवन, एल एंड आइ, रेजिडेंशियल) और उप निदेशक (भवन, सी एंड आइ) को जमा करानी होगी। नोटिस पर अमल नहीं करने पर जुर्माना लगाने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

गौरतलब है कि दिल्ली एनसीआर 3 सक्रिय फॉल्ट लाइन पर मौजूद है। ये फॉल्ट लाइन सोहना, मथुरा और दिल्ली मुरादाबाद में आती हैं, वहीं जबकि गुरुग्राम सात सक्रिय फॉल्टलाइन पर मौजूद है। जो पूरे एनसीआर में सबसे ज्यादा खतरे में है। दिल्ली सिस्मिक जोन-4 में आता है, ऐसे में यहां पर भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है। 

Posted By: JP Yadav

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