नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए एमसीडी ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड (सेकी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। निगम मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एमसीडी के विशेष अधिकारी अश्विनी कुमार व आयुक्त ज्ञानेश भारती उपस्थित थे।

एमसीडी की ओर से मुख्य अभियंता संदीप शर्मा और एसईसीआई के निदेशक (सौर) संजय शर्मा द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एमसीडी के अपने ही 1800 निगम भवन हैं जिसकी छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा सकते हैं।

इस परियोजना के तहत 1186 स्कूलों, 289 सामुदायिक सेवा भवनों, 251 स्वास्थ्य विभाग भवनों और 75 कार्यालयों और अन्य भवनों सहित निगम भवनों का उपयोग सेकी द्वारा छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए किया जा सकता है। वैसे, एमसीडी द्वारा अब तक 1,800 निगम भवनों में से 558 पर कुल 11.7 मेगावाट की रूफटाप सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

इन सौर संयंत्रों ने लगभग 1.5 करोड़ ऊर्जा इकाइयां उत्पन्न की हैं जो सालाना 15 करोड़ रुपये के लगभग राजस्व की बचत करती हैं। इसके अतिरिक्त, सौर पहल से सालाना लगभग 15210 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करके पर्यावरण संरक्षण की दिशा में योगदान दिया है।

सोलर नीति के जरिए हर छत पर सोलर पैनल लगाएगी एनडीएमसी

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) की बैठक में सोलर नीति-2022 का प्रस्ताव किया गया। इसके जरिए परिषद क्षेत्र की हर छत पर सोलर पैनल लगाने का प्रयास किया जाएगा। लोगों व विशेषज्ञों के सुझावों के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

बैठक के बाद परिषद उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने बताया कि परिषद अपने अधिकार क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन की सभी संभावनाओं का दोहन करेगा। सौर नीति को एक किलोवाट या उससे अधिक की क्षमता वाली किसी भी सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली के लिए लागू किया जाएगा।

यह नीति पालिका परिषद में सभी बिजली दरों के तहत सभी बिजली उपभोक्ताओं और एनडीएमसी क्षेत्र में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना और संचालन करने वाली सभी संस्थाओं पर लागू होगी। इसके अलावा, एनडीएमसी द्वारा सरकारी संगठनों, सरकारी स्वामित्व वाले अस्पताल , स्कूलों और अन्य शैक्षणिक, तकनीकी, अनुसंधान, संस्थान, छात्रावास फायर स्टेशन, दूतावास, स्टेडियम, पार्किग स्थल, बस स्टाप आदि पर सोलर पैनल लगाने की योजना पर काम कर रहा है।

इन सभी पर नेट मीटरिंग सिस्टम लगाई जाएगी। जिसके जरिए जितनी बिजली उक्त इमारत द्वारा खर्च की जाएगी, उससे बचने वाली बिजली को ग्रिड में भेज दिया जाएगा और इसका भुगतान किया जाएगा। उपाध्याय ने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2024 तक अपने द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पूरी ऊर्जा ग्रीन स्त्रोतों से प्राप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए भी एनडीएमसी एहतियाती कदम उठा रही है।

Edited By: Pradeep Kumar Chauhan

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