नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। कांग्रेस में खुली जंग के संकेत दिल्ली में भी मिल रहे हैं। सिर्फ एक चिंगारी का इंतजार है, आग भड़क उठेगी। जल्द यहां अहम बैठक होने वाली है। इसी में विरोध की अगली रणनीति तय होगी। यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि दिल्ली में बगावत का सेनापति कौन होगा। पुराने कांग्रेसी मुखर हो रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के चलते स्थिति नियंत्रण में है, अन्यथा दिल्ली के साथ और राज्यों में भी बगावत हो चुकी होती। दशकों से पार्टी को मजबूत कर रहे नेताओं की बात सुनी जानी चाहिए। 

गौरतलब है कि असंतुष्ट 23 नेताओं में दिल्ली के भी चार शामिल हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अर¨वदर सिंह लवली, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित व पूर्व विस अध्यक्ष योगानंद शास्त्री हैं। सूचना है कि इन असंतुष्ट नेताओं की फेहरिस्त और लंबी हो गई है। इनमें कई पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद एवं पूर्व विधायक भी शामिल हो गए हैं। असंतुष्ट पार्षद भी एक-एक कर पार्टी को अलविदा कह रहे हैं। 

सूत्रों की मानें तो असंतुष्ट नेताओं ने तय किया है कि पार्टी में सुधार की मांग को देशव्यापी बनाने के लिए दिल्ली से आवाज उठना जरूरी है। इसीलिए जल्द यहां बैठक की तैयारी चल रही है। इस बैठक में राजधानी के सभी असंतुष्टों की भूमिका तय की जाएगी। साथ ही यह तय होगा कि किसे, कब और कहां क्या कहना है। 

कांग्रेस की कमान अगर अनुभवहीन नेताओं को थमाकर अनुभवी नेताओं को घर बैठा दिया जाएगा, तो पार्टी का पतन निश्चित ही है। अपनी कमियां स्वीकार करना और उन्हें दूर करना गलत बात नहीं है। कमी बताता भी वही है, जिसे पार्टी की चिंता हो। वरना जिस तरह और बहुत से नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, वे भी निकल जाएंगे। जब नेता ही नहीं रहेंगे, तो पार्टी का वजूद भी नहीं रह पाएगा। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रयोग सत्ता में रहते हुए किए जाते हैं और कांग्रेस की स्थिति प्रयोग करने की नहीं है।  

-नसीब सिंह, पूर्व संसदीय सचिव, दिल्ली सरकार 

जी-23 पर सवाल उठाना ठीक नहीं:-अजीत शर्मा 

बिहार कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा का कहना था कि हाल के दिनों में जो भी चल रहा है, वह पार्टी की सेहत के लिए ठीक नहीं है। वहीं बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य डा. अखिलेश प्रसाद सिंह भी जी-23 की बैठक में जाने वाले थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जी-23 की बैठक को लेकर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। 

राहुल को अंधेरे में रखते हैं कुछ सलाहकार:- फुरकान अंसारी 

झारखंड कांग्रेस के नेता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का कहना है कि राहुल गांधी हमारे लीडर हैं। जिन नेताओं ने अभी विरोध किया है, उसका समय ठीक नहीं है। उन्हें पार्टी फोरम पर बात रखनी चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रामेश्वर उरांव ने राहुल की पुरजोर वकालत की। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि जी-23 में भी सोनिया व राहुल के नेतृत्व को लेकर कोई विवाद नहीं है। 

जमीन पर उतरे जी-23 को:- सुनील जाखड़ 

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि जी-23 के नेताओं ने वर्षो तक राज्यसभा में बैठकर नीतियां बनाई हैं, ये जमीनी संघर्ष को भूल चुके हैं। इन नेताओं को जमीन पर उतर कर संघर्ष करने की जरूरत है। इन्हें मंगलवार को महंगाई के खिलाफ राजभवन के घेराव में शामिल होना चाहिए। उनके अनुभवों को लाभ हमें मिलेगा और उनका भी रिफ्रेशर कोर्स हो जाएगा। 

पार्टी को वरिष्ठ नेताओं की बात अवश्य सुननी चाहिए। उनके साथ बैठक करनी चाहिए। अगर सुझाव सामने आ रहे हैं तो उन पर विचार मंथन करना गलत बात नहीं है। जो नेता सुझाव दे रहे हैं, उन्होंने भी पार्टी को अपना पूरा जीवन दिया है। आज उन्हें इस तरह से बेगाना नहीं किया जा सकता। 

-महाबल मिश्र, पूर्व सांसद, दिल्ली 

जी-23 की बैठक में वे लोग शामिल रहे, जिन्होंने पार्टी की मजबूती के लिए जिंदगी गुजार दी। गुलाम नबी आजाद वैसे ही नेताओं में शुमार हैं। उनको लेकर सवाल उठाना उचित नहीं। 

-डा. अखिलेश प्रसाद सिंह, राज्यसभा सदस्य 

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