नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। खराब आर्थिक हालत से जूझ रहे नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही को सीएजी ने उजागर किया है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-18 में जो स्वच्छता मिशन के तहत जो वाहन खरीदे गए उनकी आपूर्ति में छह से लेकर आठ माह तक की देरी हुई जबकि निगम अधिकारियों ने इसका भुगतान पहले ही कर दिया था। सीएजी के अनुसार ऐसा करना आपूर्ति एवं निपटान महानिदेशालय (डीजीएसएंडडी ) की शर्तों का उल्लंघन है।

नियमों के अनुसार 90 प्रतिशत भुगतान अस्थायी रसीद के तहत किया जाता है और बचा हुआ दस प्रतिशत भुगतान वाहन प्राप्त करने के बाद किया जाता है। सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2017 में तत्कालीन उत्तरी निगम ने 20 ट्रक चेसिस व 20 टिपर ट्रकों की खरीद के लिए दो अलग-अलग निविदाओं पर 2.24 और 4.03 करोड़ रुपये की पूरी राशि जारी कर दी। इतना ही नहीं जब वाहनों की आपूर्ति की गई तो वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) एक जुलाई 2017 को लागू हो चुका था।

इस प्रकार से टिपर व ट्रकों की कीमत में 0.05 करोड़ की कमी आई, लेकिन इस अतिरिक्त भुगतान को भी वापस नहीं लिया गया। सीएजी के अनुसार 20 ट्रक चेसिस का अग्रिम भुगतान 10 जुलाई 2017 को किया गया। जिसके आधार पर दो सितंबर 2017 को वाहनों की आपूर्ति डिलीवरी होनी थी लेकिन यह डिलीवरी 172 दिन अधिक 22 फरवरी 2018 को हुई। इसी प्रकार से 20 टिपर ट्रकों के लिए 28 मार्च 2017 को अग्रिम भुगतान हुआ और इसकी डिलीवरी 12 जुलाई 2017 को होनी थी जो कि 231 देरी से 28 फरवरी 2018 को हुई।

इसी तरह तत्कालिक दक्षिणी निगम 6.08 करोड़ की लागत से 62 वाहनों को खरीदा गया था। इसमें 31 वाहनों की आपूर्ति जून 2017 में हो गई थी जबकि चेसिस का निर्माण जुलाई 2018 में प्रदान किया गया। जिससे दस माह तक यह वाहन स्टोर में बेकार पड़े रहे।

पूजीगत संपत्ति खरीदनी थी, उठाते रहे कचरा

तत्कालीन निगम को दिल्ली सरकार से स्वच्छता मिशन के तहत 23.55 करोड़ रुपये जारी किए गए इसमें से 13 करोड़ निगम ने वाहन खरीदने की बजाय दैनिक गतिविधि जैसे टिपरो का किराया देने, ट्रकों और बुलडोजर के किराये देने पर कर दिया। हालांकि निगम ने इसका स्पष्टीकरण भी दिया कि वह ठोस कचरा प्रबंधन के तहत ऐसा कर सकते हैं जबकि सीएजी ने निगम के जवाब को खारिज कर दिया। सीएजी का कहना है कि यह राशि पूजीगत संपत्ति खरीदने के लिए करनी थी। निगम ने जिस प्रकार से इसको खर्च किया है उससे संपत्ति का कोई विनिर्माण नहीं हुआ।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari