नई दिल्ली [निहाल सिंह]।  उत्तरी दिल्ली नगर निगम में महापौर, उप महापौर और स्थायी समिति के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद न मिलने से नाराज हुए पार्षदों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश हो रही है। यही वजह है कि महापौर और उप महापौर पद के उम्मीदवारों के ऐलान के बाद पार्षद पद से लेकर पार्टी के सभी पदों से मुक्त होने का ऐलान करने वाले तिलकराज कटारिया ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने न तो निगम सचिव को कोई पत्र लिखा है और न ही महापौर को। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ लोगों की मान मनौव्वल की कोशिश के बाद कटारिया के तेवर नरम पड़ गए हैं। इसलिए अब वह चुप रहकर अपने क्षेत्र के लिए कार्य करेंगे। जब तक उन्हें कोई सम्मानजनक पद नहीं मिल जाता तब तक इसी तरह चुप रहकर काम करते रहेंगे। उनके समर्थक उनके लिए प्रदेश भाजपा में भी सम्मानजनक पद की मांग कर रहे हैं।

अध्यक्ष की मौजूदगी में उपाध्यक्ष ने चलाई बैठक

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में उस दौरान अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब अध्यक्ष की मौजूदगी में उपाध्यक्ष ही बैठक चलाने लग गईं। दरअसल, अध्यक्ष राजदत्त पहली बार स्थायी समिति के अध्यक्ष बने हैं, जबकि उपाध्यक्ष तुलसी जोशी एक बार स्थायी समिति की सदस्य और दो बार जोन की अध्यक्ष रह चुकी हैं। जब पहली बार बैठक शुरू हुई तो सत्तापक्ष के पार्षद विभिन्न विषयों पर चर्चा में भाग लेकर बोल रहे थे। इसी दौरान विपक्ष के पार्षद वेदपाल भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी करने लग गए। उपाध्यक्ष ने इस बात पर सख्त शब्दों से पलटवार किया। वहीं, कई बार ऐसे मौके भी आए जब विपक्षी पार्षद सत्तापक्ष पर हावी हो रहे थे तो बार-बार उपाध्यक्ष ही उनको चुप करा रही थीं। इस पर निगम के अधिकारियों में चर्चा शुरू हो गई कि बैठक अध्यक्ष चला रहे हैं या उपाध्यक्ष?

ईस्ट इंडिया कंपनी है या अधिकारी

दिल्ली के तीनों निगमों में समय-समय पर प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। सत्तापक्ष से लेकर विपक्षी दल के पार्षद इन पर बेलगाम होने के साथ इनके भ्रष्ट आचरण को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं, लेकिन शुक्रवार को दक्षिणी निगम की स्थायी समिति की बैठक में ऐसा हुआ कि पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से कर दी। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी निरंकुश होकर काम कर रहे हैं। इन पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है, क्योंकि मनमाने तरीके से अधिकारियों का काम करना सही नहीं है। भूपेंद्र गुप्ता ने यह भी कहा कि कई डेपुटेशन पर आए अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन कई तो निगम का खजाना खाली करने के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह निगम को लूटने की कोशिश में लगे हैं और कई तो लूटकर चले गए हैं।

पैसे से बड़ा दिल

कहते हैं कि कई स्थानों पर दिल जो है पैसे से बड़ा हो जाता है। अगर आपके पास इच्छाशक्ति है तो आप संसाधनों के भी अभाव में वह कार्य कर सकते हैं जो एक संसाधन वाला व्यक्ति नहीं कर पाता है। दक्षिणी दिल्ली निगम ने भी ऐसा ही कुछ किया है। खराब आर्थिक स्थिति है। आलम यह है कि वेतन तक भी जारी नहीं हो पा रहा है। कर्मी वेतन के इंतजार में लगे हुए हैं। इसके बावजूद निगम ने अपने कोरोना योद्धाओ के सम्मान का ऐलान किया। निगम ने पहले अपने कोरोना योद्धाओं की कोरोना से जान जाने पर 10 लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया था। अब निगम ने उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का फैसला किया है। सराहनीय बात है कि स्थायी कर्मचारी के परिवार के सदस्य को स्थायी और अनुबंधित कर्मचारी के परिवार के एक सदस्य को अनुबंध पर नौकरी दी जाएगी।

 

Posted By: JP Yadav

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