नई दिल्ली [मनीषा गर्ग]। एक दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी जनकपुरी स्थित अतिविशिष्ट अस्पताल आजतक पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है। उस पर मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ यहां सुविधाएं दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के बीच एक तरफ स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है, दूसरी तरफ अस्पताल में घटती सुविधाओं पर प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

छह माह से बंद है कैथ लैब

आश्चर्य की बात यह है कि कुछ चिकित्सीय संसाधनों के अभाव के कारण यहां बीते छह माह से कैथ लैब बंद है। इसके अलावा संसाधन के अभाव में अस्पताल में शुरू किए गए ब्लड बैंक को बंद कर दिया गया है। अस्पताल की महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों को रखने के लिए बनाए गए कक्ष पर भी ताला लग गया है। इसके साथ में अस्पताल में एक भी गैस्ट्रोलाजी व नेफ्रोलाजी विशेषज्ञ नहीं हैं, ऐसे में मरीजों को उचित स्वास्थ्य सलाह नहीं मिल पा रही है। वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए अस्पताल में खाने की सुविधा भी आज तक शुरू नहीं हुई है।

पहले कोरोना अब संसाधन के अभाव में बंद है लैब

बदलती जीवनशैली के साथ हृदय रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है, पर दिल्ली के सर्वाधिक आबादी वाले जिले के पांच बड़े अस्पतालों में जनकपुरी अतिविशिष्ट अस्पताल एकमात्र अस्पताल है जहां हृदय रोग विभाग है। पहले कोरोना महामारी के कारण कैथ लैब बंद रही और अब संसाधन के अभाव के चलते कैथ लैब को शुरू नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक कैथ लैब में प्रयोग में आने वाली वस्तुओं काे अस्पताल प्रशासन द्वारा खरीदने में आनाकानी की जा रही है। इस कारण यहां एंजियोग्राफी, स्टंट व पेसमेकर डालने की सुविधा ठप पड़ी है और मरीजों को जीबी पंथ, आरएमएल या सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। कई मामलों में डाक (दिल्ली अरोग्य कोष) व डैन (दिल्ली अरोग्य निधि) के तहत मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

आपातकालीन स्थिति से निपटने में अस्पताल के कर्मचारी असमर्थ

ज्ञात हो जनवरी 2018 में यहां कैथ लैब की शुरुआत की गई थी। कैथ लैब बंद होने के कारण इन दिनों हृदय रोग विभाग में केवल ओपीडी चलाई जा रही है और वार्ड में मरीजों की भर्ती हो रही है। जहां मरीजों को केवल साधारण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। हालात तब ऐसे है, जब यहां चार हृदय विशेषज्ञ मौजूद हैं। बावजूद इसके मरीज उन विशेषज्ञों की सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे है। लंबे से अस्पताल में कार्डियोलाजी विभाग को पूर्ण रूप से शुरू करने की बात कही जा रही है, पर इस दिशा में कोई खास प्रयास नहीं दिख रहे है। न ही यहां आपातकाल विभाग शुरू हो पाया और न ही आपरेशन थिएटर। आलम यह है कि आपातकालीन स्थिति से निपटने में अस्पताल के कर्मचारी असमर्थ है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य मंत्री

कोरोना महामारी के कारण कैथ लैब अभी बंद है, पर इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा।

सत्येंद्र जैन, स्वास्थ्य मंत्री