नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। केंद्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में ‘भारत की आजादी के महानायक-नेताजी सुभाष’ विषय पर वर्चुअल गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कोरोना काल में 341वां वेबिनार था। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्ण अक्षर हैं, उनके बिना आजादी का इतिहास अधूरा है। उनके तप, त्याग, निर्भीकता, संघर्ष और बलिदान से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इंडिया गेट से अंग्रेजी गुलामी की प्रतीक अमर जवान ज्योति को स्थान्तरित करके सराहनीय कार्य किया गया है। यह काम देश के आजाद होते ही हो जाना चाहिए था। कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र गुलामी के चिन्हों को सुरक्षित नहीं रखता। मोदी सरकार द्वारा इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाने का निर्णय सराहनीय कदम है। ग्वालियर के वैदिक विद्वान आचार्य चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि बोस भारत की आजादी के महानायक थे। उनका बाल्यकाल, विद्यार्थी जीवन, युवावस्था अर्थात 48 वर्ष का संपूर्ण जीवन भारत के गौरव, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की लड़ाई व संघर्ष में दिनरात लड़ते-लड़ते चला गया। डा. रचना चावला ने कहा कि नेताजी का जीवन राष्ट्र को समर्पित था।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य ने कहा कि कोई भी राष्ट्र की नींव उसके नौजवानों के बलिदान पर ही टिकी रहती है। इस मौके पर गायिका दीप्ति सपरा, आस्ट्रेलिया से प्रेम हंस, अमृतसर से रचना वर्मा, रजनी चुघ, बिंदु मदान, पिंकी आर्या, प्रवीना ठक्कर, रविंद्र गुप्ता, रेणु घई ने देशभक्ति गीत सुनाए।

Edited By: Mangal Yadav