नई दिल्ली [राहुल मानव]। Covid-19 Treatment: दुनिया भर में कोविड-19 के इलाज के लिए कई दवाइयों को तैयार करने पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। ऐसी ही एक पहल जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (Jamia Millia Islamia University) के सेंटर फॉर इंटर-डिसिप्लिनरी इन बेसिक साइंसेज के डॉ. एम. इम्तियाज हसन ने की है। उन्होंने दावा किया है कि हेपेटाइटिस-सी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटी वायरल ड्रग ग्रेसेप्रवीर और एचआइवी-1 बीमारी के  बचाव में इस्तेमाल की जाने वाली दवाई माराविरोक सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित कोविड-19 के मरीजों के इलाज में कारगर हो सकती है।

कैसे किया शोध?

डॉ. एम. इम्तियाज हसन ने जागरण संवाददाता से बातचीत में कहा कि सार्स-कोव-2 वायरस में मौजूद प्रोटीन (मेन प्रोटीएज-प्रोटीन का नाम) के साथ करीब 2,388 अमेरिका का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (Food and Drug Administration of America) से स्वीकृत दवाइयों को कंप्यूटर अल्गोरिथम के जरिये इसका विश्लेषण किया गया। कंप्यूटर अल्गोरिथम शोध के अंदर के एक प्रकिया होती है, जिसमें शोधकर्ताओं की तरफ से अपने अनुसंधान में कंप्यूटर के सहयोग से इस सार्स-कोव-2 के प्रोटीन के संरचना के अनुसार इन दवाइयों का चयन किया गया। इसमें मैथ्स की इक्वेशन को भी इस्तेमाल किया गया। 2,388 ड्रग का सार्स-कोव-2 वायरस के प्रोटीन के साथ उपयोग करने के बाद अंत में 10 दवाइयों का चयन किया गया। जिसमें से हेपेटाइटिस-सी और एचआइवी-1 के लिए उपयोग होने वाली दवाई के नतीजे अच्छे आए। उनका यह शोध लाइफ साइंसेज के क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पत्रिका बायो-साइंस रिपोर्ट में दो दिन पहले प्रकाशित हो चुका है।

स्वास्थ्य मंत्रालय से करेंगे बात

प्रो. एम. इम्तियाज हसन का कहना है कि इस शोध में कोई क्लीनिकल ट्रायल नहीं हुआ है। इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए और कोविड-19 के मरीजों पर हेपेटाइटिस-सी और एचआइवी-1 के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइओं का उपयोग करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि इन दोनों दवाइयों का किसी प्रकार का साइड-इफेक्ट होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि यह बाजार में उपलब्ध हैं और इस्तेमाल की जा रही हैं।

यह भी जानें

  • कोरोना वायरस संक्रमण पर लगाम लगाने की कवायद जारी है और दुनिया भर में वैज्ञानिक इस पर शोध में जुटे हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया में कोरोना वायरस संक्रमण की दवाई का मनुष्यों में परीक्षण शुरू करने की घोषणा हो चुकी है। शुरुआती चरण में मेल्बर्न और ब्रिस्बेन शहरों के 131 लोगों पर दवा का परीक्षण होगा। वहीं, दावा किया जा रहा है कि दवा के इसी वर्ष आने की उम्मीद।
  • ब्रिटेन, फ्रांस, इजरायल, चीन, अमेरिका समेत कई देश तकरीबन दर्जन भर प्रायोगिक दवाएं परीक्षण के प्रारंभिक चरण में हैं।

 

Posted By: JP Yadav

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