नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियंट पर टीके का असर कम होता है। दिल्ली के तीन अस्पतालों सहित कई संस्थानों द्वारा मिलकर किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है। इसमें पाया गया कि वुहान में सबसे पहले पाए गए वेरियंट की तुलना में डेल्टा वेरियंट पर टीके का असर आठ गुना कम होता है। इस वजह से टीका संक्रमण से बचाव में कम असरदार है। बावजूद इसके राहत की बात यह भी है कि शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना रोधी  टीका संक्रमण के मध्यम व गंभीर लक्षणों से बचाव करने में सक्षम है। शोध में शामिल गंगाराम अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. चांद वट्टल ने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगवाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि शोध में यह देखा गया कि टीका लगवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण के मध्यम व गंभीर लक्षण कम सामने आए। ज्यादातर कर्मी हल्के लक्षणों के बाद ही ठीक हो गए। बहुत कम मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी। इसलिए यह कहा जा सकता है टीका के जरिये हम अस्पताल व आइसीयू में भर्ती होने से बच सकते हैं।

उन्होंने बताया कि गंगाराम अस्पताल, अपोलो व उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल के 100 स्वास्थ्यकर्मियों पर यह अध्ययन किया गया। टीका लेने के बाद वे कोरोना संक्रमित हो गए थे। इन सभी स्वास्थ्यकर्मियों को कोविशील्ड टीका लगाया गया था। डेल्टा वेरियंट में फेफड़ों की कोशिकाओं से चिपकने की क्षमता अधिक होती है। इस वजह से यह अल्फा वेरियंट की तुलना में अधिक संक्रामक है।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियंट के मरीज सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों के दौरान दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर में संभावित लहर की वजह भी कोरोना वायरस का डेल्टा वेरियंट ही बनेगा। ऐसे में लोगों कोे अभी से सतर्क रहने की जरूरत है।

Edited By: Jp Yadav