नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से नई तकनीक के जरिये शुरू की गई कोरोना वायरस संक्रमण के जांच का ट्रायल यदि सफल रहा तो आने वाले दिनों में लार, फूंक या आवाज के सैंपल से ही संक्रमण का पता लगाया जा सकेगा। ट्रायल से जुडे़ डॉक्टर कहते हैं कि इसका परिणाम सामने आने में करीब एक माह का समय लगेगा। यदि इसमें सफलता मिलती है तो कोरोना की जांच बेहद आसान हो जाएगी और सहूलियत भी होगी।

सफलता मिलने के बाद एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशनों पर तो इस तकनीक से यात्रियों की तुरंत कोरोना वायरस संक्रमण की जांच हो सकेगी। ट्रायल के लिए 28 जुलाई से 6 अगस्त तक कैंप लगाकर 10,022 लोगों के सैंपल लिए गए। ये कैंप लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, आरएमएल, लोकनायक अस्पताल, गंगाराम अस्पताल व आकाश अस्पताल में लगाए गए। इसके अलावा डीआरडीओ के लैब में भी कैंप लगाकर सैंपल लिए गए। सबसे अधिक गंगाराम अस्पताल से 3,232 सैंपल लिए गए। अस्पताल में मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अंबुज गर्ग इसके प्रमुख इन्वेस्टिगेटर हैं।

अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. एसपी बयोत्रा ने कहा कि ट्रायल में आरटी-पीसीआर व एंजीजन जांच के अलावा लार का सैंपल लेकर भी जांच की जा रही है। इसके अलावा फेफडे़ की जांच के लिए एक ब्रीथ एनालाइजर तैयार किया गया है। इसके माध्यम से फूंक मारकर फेफडे़ की जांच की जाती है। इसी तरह यह भी जांच की जा रही है कि आवाज में किस तरह का बदलाव होता है।

डॉक्टर कहते हैं कि लार, आवाज व फूंक मारकर जांच के नतीजे को आरटी-पीसीआर जांच के परिणाम से तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि जांच का कौन सा तरीका आसान है। इस प्रयोग के सफल होने के बाद जांचकर्ताओं के साथ पीड़ितों को भी राहत मिलेगी। 

 

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