नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए देश में तीन सप्ताह के लॉकडाउन की घोषणा के अगले दिन लोग जरूरी वस्तुओं की खरीदारी करते हुए नजर आए। लोग राशन लेने के लिए रिटेल स्टोर और केंद्रीय भंडार पर पहुंचे। जहां पहले से रिटेल स्टोर संचालकों और केंद्रीय भंडार संचालकों ने ग्राहकों को सोशल डिस्टेसिंग यानी एक-एक मीटर की दूरी पर खड़े करने की व्यवस्था की हुई है।

नई दिल्ली के रिटेल स्टोर और पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा स्थित एक रिटेल स्टोर के बाहर सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी रही। स्टोर संचालकों की ओर से ग्राहकों को एक-एक मीटर की दूरी पर खड़े करने की व्यवस्था की गई थी। स्क्रीनिंग के बाद ही ग्राहकों को स्टोर व दुकानों में अंदर आने की अनुमति दी गई। ग्राहक सुदेश शर्मा ने बताया कि वह भजनपुरा स्थित एक रिटेल से राशन लेने के लिए पहुंचे हैं।

उन्होंने बताया कि सभी ग्राहकों की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। सभी स्टोर पर ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं, नई दिल्ली के महादेव रोड स्थित केंद्रीय भंडार पर भी सुबह से ही लोगों की भीड़ लगी रही, क्योंकि एक निश्चित संख्या में ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति थी।

सख्ती से मुश्किल में दवा दुकानदार

लॉकडाउन के दौरान भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आश्वस्त किया है कि दवा व चिकित्सीय उपकरण की दुकानों को लॉकडाउन से बाहर रखा जाएगा। लेकिन, पुलिस आम लोगों की तरह ही दवा विक्रेताओं और दवा दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी रोक रही है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर हाथापाई की नौबत तक आ गई। दवा देकर वापस आ रहे वाहनों को भी जब्त किए जाने का आरोप है।

दवा व चिकित्सीय उपकरणों के थोक बाजार भागीरथ पैलेस की अधिकांश दुकानों पर बुधवार को ताला लगा रहा। 500 से अधिक दुकानों में से मुश्किल से 30-40 दुकानें खुल सकीं। वहीं, चिकित्सीय उपकरण की 750 से अधिक दुकानों पर ताला लगा रहा। अगर यह स्थिति आगे बनी रही तो गली-मोहल्लों में स्थिति दुकानों में भी दवा का संकट खड़ा हो सकता है। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव आशीष ग्रोवर ने कहा कि दुकानदार किसी प्रकार अपनी दुकानों पर आ सकते हैं, पर कर्मचारियों को पुलिस की सख्ती के कारण दुकानों पर आने में दिक्कत हो रही है। इसी तरह ट्रांसपोर्टर भी माल उठाने से मना कर रहे हैं। क्योंकि भागीरथ पैलेस तक आने और दवा की आपूर्ति करने के बाद खाली ट्रकों के आने में भी परेशानी हो रही है।

प्रशासन के सहयोग की जरूरत

दिल्ली केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप नागिया ने बताया कि दिल्ली में मौजूद 15000 से अधिक दवा की दुकानों को खोलने का प्रयास हो रहा है। इसके लिए प्रशासन को कोई रास्ता निकालना होगा कि यह आगे भी निर्बाध रूप से खुले रहें। उन्होंने कहा कि दवा पहुंचाने जा रहे या दुकानों के लिए आ रहे कर्मचारियों से पुलिस बदसुलूकी कर रही है।

Posted By: Neel Rajput

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