यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दिल्ली की स्थिति पर रखी जा रही पैनी नजर, LG और AAP सरकार के बीच टूटा संपर्क; 25 दिनों से कोई संवाद नहीं
आबकारी नीति से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने गत 21 मार्च को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया ...और पढ़ें

HighLights
- सीएम के जेल में होने से नहीं जा रही फाइलें, एलजी की बैठकों में भी नहीं पहुंच रहे मंत्री
- दिल्ली के सारे हालात पर रखी जा रही निगाह, समय-समय पर केंद्र को कराया जा रहा अवगत
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद देश की राजधानी में राजनिवास और दिल्ली सरकार के बीच संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। करीब 25 दिन से दोनों के बीच कोई सीधा या औपचारिक संवाद नहीं हुआ है। राजनीतिक स्तर पर आरोप प्रत्यारोप भले जारी हाें, लेकिन दिल्ली वासियों के हित में कोई समीक्षा बैठक तक नहीं हो पा रही है।
एलजी वीके सक्सेना के स्तर पर इस सारी स्थिति पर सूक्ष्म निगाह रखी जा रही है और बीच-बीच में वस्तुस्थिति से केंद्र को भी अवगत कराया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इस संदर्भ में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
आनंद का इस्तीफा तक फाइल में बंद पड़ा
आबकारी नीति से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने गत 21 मार्च को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। करीब 25 दिन हो गए, तब से वह हिरासत/जेल में ही हैं। विडंबना यह कि इस दौरान तिहाड़ से ही सरकार चलाने का असफल प्रयास हो रहा है। जबकि जेल नियमावली इसकी इजाजत ही नहीं देती। इसी का नतीजा है कि जेल से कोई लिखित आदेश-निर्देश जारी होना तो दूर की बात, छह दिन से निवर्तमान समाज कल्याण मंत्री राजकुमार आनंद का इस्तीफा तक फाइल में बंद पड़ा है।
आनंद तकनीकी रूप से अभी भी मंत्री बने हुए
नियमानुसार यह इस्तीफा सीएम ही स्वीकृत करके एलजी को भेजेंगे और फिर एलजी इसे राष्ट्रपति को भेजेंगे। लेकिन जेल में बंद सीएम अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर ही नहीं सकते। मतलब, कोई काम ना करने के बावजूद आनंद तकनीकी रूप से अभी भी मंत्री बने हैं, जबकि औपचारिक रूप से इस्तीफा स्वीकृत न होने के कारण किसी नए मंत्री की नियुक्ति दूर तक नजर नहीं आ रही।
मौजूदा हालातों में दिल्ली सरकार का कामकाज प्रभावित न हो, इसके निमित्त एलजी ने दो बार विभिन्न मंत्रालयों की बैठक भी लेनी चाही, किंतु कोई मंत्री राजनिवास नहीं पहुंचा। ऐसे में एलजी के स्तर पर इस पर भी पूरी निगाह रखी जा रही है कि आप नेताओं द्वारा जनता को गुमराह नहीं किया जाए कि उन्हें मिल रही सुविधाएं बंद हो जाएंगी। राजनिवास ने दो बार यह स्पष्ट भी किया है कि मुख्यमंत्री के जेल जाने से जनता को मिल रही सुविधाओं का कोई संबंध नहीं है।
राष्ट्रपति शासन लगाने की आशंका सिरे से गलत
राजनिवास अधिकारियों के मुताबिक केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें या नहीं, किसी अन्य को सीएम बनाएं या नहीं, यह उनका निर्णय है। लेकिन दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की आंशका वाले आरोप सिरे से गलत हैं। ऐसी दूर-दूर तक कोई योजना नहीं है। सीएम को खुद ही देखना है कि लगातार लंबित हो रही फाइलें कैसे निपटाई जाएंगी, आचार संहिता खत्म होने पर कैबिनेट की बैठक कैसे होगी, नए मंत्री की नियुक्त किस प्रकार होगी और राजनिवास से तालमेल कैसे बैठाया जाएगा।
सीएम का यथासंभव सहयोग किया जा रहा
राजनिवास अधिकारियों ने दावा किया कि भले ही आप नेता कुछ भी आरोप लगाते रहें, लेकिन सीएम को यथासंभव सहयाेग किया जा रहा है। घर के खाने के अलावा उन्हें अखबार और टीवी की सुविधा भी दे दी गई है। उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए हर समय एक मेडिकल अटेंडेंट भी वहां रहता है।
