नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। ग्रेटर कैलाश स्थित मैक्स वेटनरी अस्पताल के डॉक्टरों ने फीमेल डॉग खुशी के शरीर में पेसमेकर लगाकर सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। दिल की धड़कनें कम होने से उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। ये सर्जरी करीब डेढ घंटे तक चली थी। अस्पताल ने दावा किया है कि भारत में किसी डॉग को पेसमेकर लगाने का यह पहला मामला है।

कार्डियोलोजिस्ट डॉ. भानुदेव शर्मा ने बताया कि डॉग की धड़कनें काफी कम हो रही थीं। इससे वह बेहोश होने लगी थी। डॉग की धड़कनें 60-120 बीट प्रति मिनट होनी चाहिए थी लेकिन वह सिर्फ 20 बीट प्रति मिनट थी। इसके कारण उसके शरीर के अंग काम करना बंद कर रहे थे। ऑपरेशन के बाद पेसमेकर लगाकर उसे एक नया जीवन दिया गया है।

हृदय से बहने वाले रक्त की मात्रा काफी कम हो गई थी और कुत्ते बार-बार बेहोश हो रहा था। ग्रेटर कैलाश के मैक्स वेट्स अस्पताल में छोटे जानवरों के लिए पारंपरिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ भानु देव शर्मा ने कहा कि खूशी की हृदय गति सामान्य तौर पर 60-120 बीट प्रति मिनट की तुलना में 20 बीट प्रति मिनट कम थी। शर्मा ने कहा कि उनके मालिकों के अनुसार खुशी एक आलसी कुत्ता है।

पिछले साल फरवरी में एक आपातकालीन कान के ऑपरेशन के दौरान वह बोहोश होकर गिर गई थी, लेकिन सर्जन उसे पुनर्जीवित करने में कामयाब रहे। तब डॉक्टरों को पहली बार एहसास हुआ कि खुशी किसी गंभीर समस्या से जूझ रही है। जब खुशी उसके कान की सर्जरी के बाद ठीक हो गई, तो डॉक्टरों ने उसकी जांच की और एक होल्टर ईसीजी ने एक पूर्ण हृदय अवरोधन दिखाया।

डॉ भानु और डॉ कुणाल देव शर्मा के नेतृत्व में मैक्स वेट्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एक टीम ने अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ इस मामले पर चर्चा की और पेसमेकर सर्जरी की योजना बनाई जो भारत में कुत्ते के लिए पहले कभी नहीं की गई थी। 15 दिसंबर को कुत्ते का ऑपरेशन किया गया और डेढ़ घंटे की लंबी सर्जरी के बाद पेसमेकर इम्पलांट किया गया। पेसमेकर इम्प्लांटेशन के बाद खुशी जो सर्जरी से पहले बेहद सुस्त और बेजान हुआ करती थी, वह अपने सामान्य सक्रियता के साथ फिर से जीने लगी। खुशी की मालिक गुड़गांव निवासी मनु ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि जैसे वह अपने बचपन में फिर से वापस आ गई है। 

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