नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि अदालती निर्णय अंग्रेजी भाषा में होते हैं और बड़ी संख्या में यह आम नागरिकों को समझ नहीं आते हैं। लेकिन, न्याय तक पहुंच तब तक सार्थक नहीं हो सकती, जब तक कि नागरिक उस भाषा में समझने में सक्षम न हों। वे उसे बोलते और समझते हों।

यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अब चार क्षेत्रीय भाषाओं हिंदी, गुजराती, ओड़िया और तमिल में अनुवाद किया जाएगा। दिल्ली हाई कोर्ट में आनलाइन ई-इन्सपेक्शन साफ्टवेयर का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि अन्य स्थानीय भाषाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए न्यायमूर्ति अभय ओका की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।

हाई कोर्ट में हो ऐसे दो न्यायाधीशों की समिति

उन्होंने कहा कि अब इसके लिए हमारा मिशन है कि प्रत्येक हाई कोर्ट में दो न्यायाधीशों की समिति होनी चाहिए। जिनमें से एक न्यायाधीश वह होना चाहिए जो अपने व्यापक अनुभव के कारण जिला न्यायपालिका से चुना गया हो और उन्होंने अधिकांश ने निर्णय उन्हीं स्थानीय भाषाओं में दिए हैं।

इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के मशीनी अनुवाद को सत्यापित करने के लिए हाई कोर्ट अपने स्वयं के अनुवादकों के अलावा अपने सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को भी नियुक्त करेंगे।

नया जस्टिस मोबाइल एप्लिकेशन

उन्होंने प्रौद्योगिकी मिशन के हिस्से के रूप में अपनाई गई नई पहलों का साझा करते हुए कहा कि एक नया जस्टिस मोबाइल एप्लिकेशन पेश किया गया है जो अधिवक्ताओं, पत्रकारों, वादियों, सरकारी विभागों और सिस्टम के प्रत्येक हितधारक के लिए सुलभ है। विचार यह है कि अदालत के मामलों के बारे में रिकॉर्ड और जानकारी की संपूर्णता तक मुफ्त पहुंच प्रदान करना है।

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ये रहे मौजूद

इस मौके पर दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति राजीव शकधर, न्यायमूर्ति तलवंत सिंह, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल, संजीव सचदेवा समेत हाई कोर्ट व निचली अदालतों के अन्य न्यायाधीश, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष मोहित माथुर व बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

Edited By: Geetarjun

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