नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दिल्ली में कोरोना संक्रमण दर के कम होने और अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम होने पर दिल्ली के ऑक्सीजन कोटे को कम करने की मांग करते हुए एक ज़िम्मेदार सरकार की शानदार भूमिका का उदाहरण दिया।

हर दिन बढ़ रहे थे मामले

मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी दी कि, दिल्ली में अप्रैल के चौथे और मई के पहले सप्ताह में कोरोना संक्रमण की दर तेज़ी से बढ़ी थी। प्रतिदिन 80 हज़ार से एक लाख तक टेस्ट किए जाते थे और रोज़ 27-28 हज़ार नए कोरोना मामले सामने आते थे जिससे संक्रमण की दर 32% तक पहुंच गई थी। लेकिन, अब दिल्ली में मरीजों की संख्या घट रही है। संक्रमण दर अब 14% है और पिछले 24 घंटों में केवल 10400 मामले सामने आए हैं।

कोरोना संक्रमण बढ़ने पर बढ़ी थी आक्सीजन की डिमांड

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब दिल्ली में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ी तब दिल्ली को प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की ज़रूरत थी। लेकिन, संक्रमण दर के कम होने और अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम होने के बाद दिल्ली में अब ऑक्सीजन की मांग भी घट गई है।

अब फिलहाल 582 मीट्रिक टन आक्सीजन की जरूरत

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि तत्काल में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रति बेड ऑक्सीजन की कुल मांग के अनुसार अब दिल्ली को रोज 582 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की ज़रूरत है। उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद देते हुए कहा कि मुश्किल के समय में सुप्रीम कोर्ट के सहयोग से केंद्र सरकार द्वारा मांग के अनुसार 700 टन नहीं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई जिससे हज़ारों लोगों की जान बची।

अब अस्पतालों से इमरजेंसी काॅल आना हुए बंद

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ये जानकारी भी दी का अब अस्पतालों से आपात स्थिति में SOS कॉल आना भी बंद हो चुकी है। अब 24 घंटों में बमुश्किल 1-2 कॉल आती है जहां तुरंत ऑक्सीजन पहुंचा दी जाती है। इसलिए दिल्ली सरकार ने एक जिम्मेदार सरकार का कर्तव्य निभाते हुए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिख कर दिल्ली का ऑक्सीजन आपूर्ति का कोटा घटाकर प्रतिदिन केवल 582 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देने की मांग की है ताकि शेष ऑक्सीजन को बाकी ज़रूरतमंद राज्यों को दिया जा सके।