नई दिल्ली, [रीतिका मिश्रा]। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों के साथ मिलकर मीटिंग कर रही है। सरकार ने मीटिंग में राज्य सरकारों के साथ सीबीएसई से भी परीक्षा को लेकर एक विस्तृत प्लान मांगा है। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग के दौरान बोर्ड की तरफ से ये पक्ष रखा गया था कि परीक्षा 15 जुलाई से 26 अगस्त के बीच आयोजित की जाए और सितंबर तक परिणाम घोषित किया जाए। इसके साथ ही एक विकल्प ये भी दिया गया था कि परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाए। जो छात्र पहले चरण की परीक्षा में न बैठ पाएं वो दूसरे चरण की परीक्षा में बैठे। इससे कोई छात्र परीक्षा देने से भी वंचित नहीं रहेगा।

सूत्रों के मुताबिक बोर्ड को फिलहाल एक सप्ताह के अंदर केंद्र सरकार के समक्ष परीक्षा आयोजित कराने को लेकर एक रिपोर्ट पेश करनी है। जिसके बाद 1 जून को परीक्षा की तिथियां घोषित होनी की संभावना है। हालांकि, दिल्ली के स्कूलों में प्रधानाचार्यों के बीच यही मांग उठ रही है कि परीक्षा में ज्यादा देरी न की जाए। इससे छात्रों को कालेज के दाखिलों में भी समस्या आएगी। प्रधानाचार्यों के मुताबिक अगस्त या सितंबर तक परीक्षा आयोजित कराकर परिणाम जारी कर दिए जाए। इसमें देरी सही नहीं है क्योंकि अभी कोरोना की तीसरी लहर आना बाकी है और अभी कोरोना के मामलों में थोड़ी कमी देखी गई है।

प्रधानाचार्यों ने कहा कि परीक्षा आयोजित जरूर हो पर सही समय पर हो और छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए। दिल्ली सहोदय स्कूल कांप्लेक्स की अध्यक्ष अल्का कपूर ने कहा कि अगस्त में परीक्षा आयोजित करने और सितंबर में परिणाम घोषित करना का उचित रहेगा। जून में तो परीक्षा कराना संभव नहीं है क्योंकि जिस तरह से कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं उसे देखकर अभिभावक बच्चों को परीक्षा केंद्रों पर भेजने के बारे में सोच भी नहीं सकते। और अभी स्थितियां भी अनुकूल नहीं है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं बहुत महत्वपूर्ण तो हैं लेकिन वे छात्रों के जीवन से बढ़कर भी नहीं है। ऐसे में परीक्षा को अगर अगस्त के दूसरे सप्ताह तक टाल दिया जाता है तो उचित होगा और अगस्त तीसरे सप्ताह के बाद ही परीक्षा कराने को लेकर कोई निर्णय लिया जाए। मयूर विहार स्थित एवरग्रीन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या प्रियंका गुलाटी के मुताबिक परीक्षा को अगस्त माह के अंत तक ही आयोजित किया जाना चाहिए। क्योंकि तब तक कोरोना के मामलों की बेहतर समीक्षा हो पाएगी। जून या जुलाई में परीक्षा करना थोड़ा जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि रद करना तो विकल्प हो ही नहीं सकता क्योंकि इससे छात्रों का बेहतर मूल्यांकन नहीं हो पाएगा।