गाजियाबाद (जेएनएन)। गाजियाबाद जिले के मोदीनगर में हुए भोजपुर एनकाउंटर मामले में बुधवार को बीस साल बाद विशेष सीबीआइ कोर्ट फैसला सुना दिया है। इससे पहले सोमवार को कोर्ट ने एनकाउंटर में एक आइपीएस समेत चार पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया था।

भोजपुर एनकाउंटर केस में चार पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है। लाल सिंह पर दो लाख का जुर्माना, जोगिंदर सिंह पर एक लाख तीस हजार व दोनों कांस्टेबल सूर्यभान और सुभाष पर 80- 80 हजार का जुर्माना लगाया गया है।

सीबीआइ के विशेष जज राजेश चौधरी ने कोर्ट में फैसला सुनाया कि जसवीर, प्रवेश, जलालुद्दीन और अशोक को 8 नवम्बर 1996 को भोजपुर में एनकाउंटर में मार गिराया गया था। भोजपुर थाना क्षेत्र स्थित मछली गांव के पुलिया के पास चार युवकों का एनकाउंटर किया गया था। इसके बाद मारे गए युवकों के परिजनों ने इसे फर्जी बताया था। इसके बाद 20 साल से कोर्ट में यह मामला चल रहा है। सीबीआइ कोर्ट ने भोजपुर थाना के तत्कालीन एसओ लाल सिंह, सब इंस्पेक्टर जोगिंदर सिंह, सिपाही सूर्यभान व सुभाष चंद को दोषी बताया।

यह भी पढ़ें: ATM ने उगले 2000 के नकली नोट, लिखा है- 'चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया'

कोर्ट का कहना है कि पुलिस ने निहत्थे युवकों पर फायरिंग की। इस मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी व आईपीएस अधिकारी ज्योति बैलूर भी आरोपी हैं। अभी ज्योति को दोषी नहीं बताया गया है। ज्योति बैलूर भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे चुकी हैं और यूरोप में बस गई हैं।

जानें कब क्या हुआ?
8 नवंबर 1996 : मछली गांव की पुलिया पर एनकाउंटर

7 अप्रैल 1997 : सीबीआइ ने केस दर्ज किया

10 सितंबर 2001 : पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर

18 सितंबर 2007 : सीबीआइ कोर्ट ने आईपीएस ज्योति बैलूर को आरोपी मानकर तलब किया

20 फ़रवरी 2017 : सीबीआइ कोर्ट ने एनकाउंटर फर्ज़ी बताया

22 फ़रवरी 2017 : सज़ा देने पर बहस होगी

प्रमोशन पाने के लिए एनकाउंटर

सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट का मानना है कि आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने के लिए पुलिस ने एनकाउंटर किया।सीबीआइ के मुताबिक भोजपुर में मारे गए चारों लोग निहत्थे थे। चाय की दुकान पर बैठे थे। पुलिस आई और चारों को उठाकर ले गई। दो को एक पुलिया पर गोली मारी और दो को खेत में गोलियों से भून डाला।

यह भी पढ़ें: आशिक ने सोशल मीडिया के जरिए किशोरी को कर दिया बदनाम, गिरफ्तार

एनकाउंटर को साबित करने के लिए उनके पास तमंचे रख दिए गए थे। 16 राउंड फायरिंग की गई थी। पुलिस की कहानी में 48 राउंड फायरिंग होना बताया गया। पुलिस थ्योरी में सबसे करिश्मे वाली बात ये थी कि 48 राउंड फायरिंग हुई, फिर भी पुलिस की महारत देखिए कोई पुलिस वाला ज़ख़्मी नहीं हुआ था।

वहीं, पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में इतना ज़रूर कहा था कि गोलियां पुलिसवालों के कान और कंधे के पास से होकर गुज़र गईं, जबकि पुलिस का कहना था कि 48 राउंड फायरिंग रिवाल्वर, कारबाइन, स्टेनगन, रायफल और एके-47 से हुई। सीबीआइ को पुलिस की ये बात हजम नहीं हुई कि इतने खतरनाक हथियारों से फायरिंग हुई और कोई पुलिस वाला ज़ख़्मी नहीं हुआ, बल्कि चारों मारे गए।

Edited By: JP Yadav