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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 26, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

युवाओं के लिए पैरामेडिकल की फील्ड में जॉब की अपार संभावनाएं, जानें क्या-क्या योग्यताएं है जरूरी

By Sanjay PokhriyalEdited By:
Published: Wed, 26 May 2021 05:48 PM (IST)Updated: Wed, 26 May 2021 05:50 PM (IST)

Career In Paramedical कोरोना की दूसरी लहर से जिस तरह से हाहाकार मचा उससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। ...और पढ़ें

अस्पतालों पर जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें संचालित करने वाले प्रशिक्षित कर्मी पर्याप्त संख्या में नहीं थे
अस्पतालों पर जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें संचालित करने वाले प्रशिक्षित कर्मी पर्याप्त संख्या में नहीं थे

नई दिल्‍ली, जेएनएन। Career In Paramedical: पिछले महीने कोविड की दूसरी लहर बढ़ने के बाद बड़े शहरों के अस्पतालों से लेकर छोटे शहरों के अस्पतालों में भी अफरा-तफरी की स्थिति दिखी। ज्यादातर जगहों पर वेंटिलेटर होने के बावजूद या तो उन्हें चलाने वाला प्रशिक्षित स्टाफ नहीं था या फिर वे खराब पड़े थे। अच्छी बात यह रही कि कुछ जगहों पर डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ ने इन्हें चलाना सीखकर मरीजों को जीवनदान देने में मदद की। जाहिर है आने वाले दिनों में चिकित्सा उपकरणों को संचालित करने वाले प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या शहरी और ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में निश्चित रूप से बढ़ेगी और इस तरह का कोर्स करने वाले युवाओं को अच्छे अवसर मिलेंगे।

वैसे, कोविड-19 की दूसरी लहर के संकट के बाद से हेल्थकेयर सेवाओं में खासतौर से छोटे-बड़े अस्पताल, कोविड केयर सेंटर, आइसीयू, सीसीयू आदि में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की सबसे अधिक आवश्यकता देखी जा रही है। पैरामेडिकल यानी वे प्रोफेशनल्स जो अस्पताल के भीतर रोगियों की देखभाल करने एवं उनके इलाज में मदद करने के अलावा आपातकालीन स्थिति में चिकित्सकीय सहायता देने का काम करते हैं। साथ ही, आवश्यकतानुसार विभिन्न तरह की फ्लूइड और रेडियोलॉजी जांच भी करते हैं। जांच में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरणों और मशीनों का रखरखाव भी यही प्रोफेशनल करते हैं। इस तरह अस्पतालों में ऐसे लोग डाक्टरों-नर्सिंग स्टाफ के सहायक के रूप में सेवाएं देते हैं। इन्हें ही पैरामेडिक्स भी कहते हैं। बदली परिस्थितियों में नर्सिंग असिस्टेंट, लैब टेक्निशियन, रेडियोलॉजी टेक्निशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट जैसे पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

बढ़ती जॉब संभावनाएं: इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं (महिला/पुरुष दोनों) को पैरामेडिकल कोर्स करने के बाद सरकारी और निजी हॉस्पिटल्स, क्लीनिक्स, सीएचसी/पीएचसी के अलावा लैब्स में टेक्निशियन या सहायक स्टाफ के रूप में आसानी से जॉब मिल जाती है। माना जा रहा है कि सेहत के प्रति जागरूकता आने से गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए भविष्य में जैसे-जैसे देश में और अधिक हॉस्पिटल और नर्सिंग होम्स खुलेंगे, ऐसे प्रोफेशनल्स की आवश्यकता और बढ़ेगी।

प्रमुख पैरामेडिकल कोर्सेज: पैरामेडिकल में र्सिटफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री स्तर पर विभिन्न तरह के कोर्सेज कराये जा रहे हैं, जिनको करने के बाद आप हेल्थ केयर के फील्ड में आ सकते हैं। जैसे कि इन कोर्सों में प्रमुख हैं: मेडिकल लैब टेक्निशियन, एक्स-रे टेक्निशियन, एमआरआइ टेक्निशियन, सीटी स्कैन टेक्निशियन, डायलिसिस टेक्निशियन, मेडिकल रिकॉर्ड टेक्निशियन, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, नर्सिंग असिस्टेंट, ईसीजी असिस्टेंट, डेंटल असिस्टेंट, एंबुलेंस अटेंडेंट, फिजियोथेरेपिस्ट आदि।

शैक्षिक योग्यताएं: पैरामेडिकल के ये कोर्स दसवीं या बारहवीं के बाद किये जा सकते हैं। देश के विभिन्न संस्थानों में ये कोर्स उपलब्ध हैं, जहां से अपनी रुचि के हिसाब से कोई भी पैरामेडिकल कोर्स चुन सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली http://jamiahamdard.edu

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली http://ignou.ac.in

आइपी यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली www.ipu.ac.in

दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली www.dpmiindia.com

गुणवत्तापूर्ण उपचार के साथ बढ़ेंगे मौके: दिल्ली के आइपी यूनिर्विसटी के यूनिर्विसटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ऐंड पैरामेडिकल हेल्थ साइंसेज के डीन प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल साइंस में पैरामेडिक्स की शुरू से ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे लोगों की आर्थिक संपन्नता बढ़ेगी और गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए लोग अस्पतालों की ओर रुख करेंगे, यह फील्ड और तेजी से बढे़गा। क्योंकि जब लोग बड़ी संख्या में अस्पतालों में उपचार के लिए आएंगे, तो जांच भी कराएंगे और तब ऐसी जांच के लिए और उपकरणों के रखरखाव लिए उन लोगों की जरूरत पड़ेगी, जो इसमें प्रशिक्षित हों।

जाहिर है तब करियर के मौके भी ज्यादा होंगे। जैसे अभी कोरोना काल में आप देख रहे हैं कि तरह-तरह के टेस्ट विकसित हो रहे हैं, जिससे रोग के सटीक साक्ष्य मिल सकें। इस तरह की जांचों से रोग की गंभीरता का आकलन करने में मदद मिलती है और इससे समय रहते सही उपचार का रास्ता भी खुलता है। इसलिए आने वाले दिनों में इस पेशे का महत्व बढ़ने के साथ ही युवाओं के लिए इसमें अच्छी करियर अपॉच्र्युनिटी भी बढ़ने वाली है।