जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कोरोन काल के इस दौर में तमाम शातिर दिमाग आम लोगों को ठगने के काम में लगे हुए हैं। इनमें हाइ प्रोफाइल लोग तो शामिल हैं ही, कुछ पढ़ने लिखने वाले स्टूडेंट्स भी पकड़ में आ रहे हैं। इनके मन में भी संक्रमित मरीजों के तीमारदारों से ठगी करने का आइडिया आ रहा है। ये लोग तमाम तरह से ऐसे दुखी लोगों को ठगने में लगे हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया है जिसमें बीटेक में पढ़ाई कर रहा स्टूडेंट कोरोना संक्रमित मरीजों को घर में आइसीयू सुविधा मुहैया कराने के नाम पर ठग रहा था।

उत्तरी जिला पुलिस ने कोरोना संक्रमित मरीजों को घर में आइसीयू की सुविधा मुहैया कराने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले बीटेक के छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपित 21 वर्षीय आर्यन सिंह उर्फ धनंजय नोएडा के सेक्टर-77 स्थित गृह प्रवेश अपार्टमेंट का रहने वाला है। आरोपित ने दिल्ली-एनसीआर व महाराष्ट्र आदि राज्यों में कुल 47 लोगों के साथ ठगी की है। ठगी के पैसों से आरोपित होटल व रिजोर्ट में मौज मस्ती करता था। फिलहाल, पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की कोविड हेल्पलाइन पर शिकायतकर्ता ने बताया कि उनका एक रिश्तेदार कोरोना संक्रमित है। उन्हें घर में आइसीयू सुविधा मुहैया कराने का एक वाट्सएप समूह पर संदेश मिला था। संदेश में दिए गए नंबर पर संपर्क किया, जिसमें 3950 रुपये में आइसीयू घर में स्थापित करने की बात कही गई। पीडि़त ने 30 अप्रैल को आरोपित के ई-वालेट में पैसे जमा कर दिए। उसके बाद पैसे जाम होने के बाद आरोपित ने अपना फोन बंद कर दिया। इस मामले में वजीराबाद थाने में मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच के लिए एसीपी उमा शंकर की देखरेख में एसआइ रोहित की टीम का गठन किया गया।

पुलिस टीम ने आरोपित के मोबाइल नंबर और आनलाइन लेनदेन की तकनीकी जांच कि तो पता चला कि आरोपित की लोकेशन जम्मू की है। यह भी पता चला कि आरोपित जम्मू के आलीशान होटल में है। ऐसे में पुलिस टीम ने आरोपित को पकड़ने के लिए होटल में छापेमारी की, लेकिन वह वहां से निकला चुका था। इसके बाद पुलिस टीम ने आरोपित की लोकेशन के सहारे से पठानकोट से उसे गिरफ्तार कर लिया।

इंस्टाग्राम की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया देख ठगी का बनाया मन

पूछताछ में आरोपित से पता चला कि उसने अपने इंस्टाग्राम में आक्सीजन सिलेंडर को लेकर पोस्ट डाली थी। उस पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में उसके मन में मरीजों को घर में आइसीयू मुहैया कराने के नाम पर धोखाधड़ी का विचार आया। उसने कई वाट्सएप समूह पर अपना नंबर और आइसीयू मुहैया कराने का संदेश वायरल किया था। पूछताछ में यह भी पता चला कि आरोपित पीडि़तों से कम पैसा ही लेता था। इससे उसे यह लगता था कि पीडि़त कम पैसा होने के कारण पुलिस से शिकायत नहीं करेंगे।