नई दिल्ली, जेएनएन। मस्तिष्क का ऑपरेशन बड़े उम्र के मरीजों के लिए भी बहुत जोखिम भरा होता है। थोड़ी सी चूक जीवन पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में 20 दिन के बच्चे के मस्तिष्क की सफल सर्जरी बड़ी सफलता है, वह भी तब जबकि उसका वजन महज 1.16 किलोग्राम रहा हो। फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसी ही सर्जरी करने का दावा किया है।

डॉक्टरों का कहना है कि दुनिया में पहली बार इतने कम वजन के किसी बच्चे के ब्रेन की सर्जरी की गई है। अस्पताल ने इसे गिनीज व‌र्ल्ड रिकॉ‌र्ड्स व लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया है। सर्जरी के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। अब वह करीब चार महीने का हो चुका है। अस्पताल के अनुसार, बच्चे का जन्म प्रीमैच्योर हुआ था। गर्भावस्था के 33वें सप्ताह में उसका जन्म हो गया था। वह जुड़वां बच्चों में से एक है।

बच्चे के पिता दिवाकर झा व मां दीपा मिश्रा फरीदाबाद में ही रहते हैं। दिवाकर ने कहा कि एक बच्चा स्वस्थ है, दूसरे की हालत गंभीर थी। उसे इलाज के लिए सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे पीडियाट्रिक विभाग के डॉक्टरों की देखरेख में वेंटिलेटर पर रखा गया।

डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के तीसरे सप्ताह में उसे मिर्गी के दौरे पड़ने लगे, तब उसके ब्रेन की एमआरआइ जांच की गई। अस्पताल के ब्रेन एंड स्पाइन सेंटर के कंसल्टेंट डॉ. पंकज डावर ने बताया कि जांच में पता चला कि बच्चे के ब्रेन में बायीं तरफ रक्त का थक्का बन गया था।

ब्रेन के करीब एक तिहाई हिस्से में यह थक्का बना हुआ था, इसलिए उसकी जल्द सर्जरी जरूरी थी। माता-पिता की स्वीकृति से बच्चे की सर्जरी की गई। इस दौरान खोपड़ी का थोड़ा हिस्सा खोलकर ब्रेन से रक्त का थक्का हटाया गया। इसके बाद से बच्चे के स्वास्थ्य में बेहतर सुधार हो रहा है। ब्रेन में बायीं ओर थक्का होने से बच्चे के शरीर का दायां हिस्सा प्रभावित होने की आशंका थी, पर सर्जरी के बाद उसके शरीर के सभी हिस्सों में मूवमेंट हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में ब्रेन की सर्जरी बहुत जटिल थी। नवजात बच्चों का सामान्य वजन ढाई से साढ़े तीन किलोग्राम होता है, जबकि इसका वजन महज एक किलो 160 ग्राम होने के कारण सर्जरी में चुनौतियां और भी ज्यादा थीं। उन्होंने कहा कि बच्चे का जन्म सामान्य प्रसव से हुआ था।

सामान्य प्रसव के दौरान कुछ बच्चों के मस्तिष्क में रक्त स्त्राव की समस्या होती है। सामान्य तौर यह रक्त त्वचा व खोपड़ी के बीच या मस्तिष्क की खोपड़ी के नजदीक वाले हिस्से में जमा होता है, जिसे निकालने के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इस बच्चे के ब्रेन में यह एक तिहाई हिस्से में था।

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