गुरुग्राम (जेएनएन)। दिल्ली से सटे हरियाणा के शिकोहपुर जमीन घोटाले से पहले मानेसर जमीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के ऊपर आंच आ चुकी है। ग्रामीणों की शिकायत है कि हुड्डा सरकार के दौरान उन लोगों के साथ धोखा किया गया था। शासन-प्रशासन की मिलीभगत से बिल्डरों ने अधिग्रहण का भय दिखाकर 444 एकड़ जमीन खरीद ली थी।

आइएमटी मानेसर के विस्तार के लिए प्रदेश सरकार ने 27 अगस्त 2004 को सेक्शन चार का नोटिस जारी किया था। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो की सरकार थी। कुछ महीने बाद ही प्रदेश में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बन गई थी। शिकायत है कि इसके बाद किसान कई बार तत्कालीन मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मिले।

उन्होंने हर बार आश्वासन दिया कि जमीन छोड़ दी जाएगी, लेकिन 25 अगस्त 2005 को सेक्शन 6 का नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस जारी होते हुए इलाके में किसानों के पास बिल्डरों के एजेंट आने शुरू हो गए थे। वे कहने लगे कि यदि सरकार आपकी जमीन लेती है, तो आपको बहुत कम पैसे मिलेंगे। आप उनसे यदि सौदा करते हैं तो अच्छी राशि मिलेगी। किसानों ने देखा कि सरकार उनकी जमीन हर हाल में लेगी ही। इस डर से उन्होंने बिल्डरों को जमीन बेच दी।

कुछ किसानों ने जमीन नहीं बेची तो तत्कालीन सरकार ने 2 अगस्त 2007 को सेक्शन 9 के नोटिस जारी किये। इस नोटिस के बाद मान लिया जाता है कि जमीन सरकार की हो गई। शिकायत है कि सेक्शन 9 के नोटिस के बाद भी काफी जमीन बिल्डरों ने खरीदी।

इस तरह जमीन अधिग्रहण का डर दिखाकर मानेसर, नखड़ौला एवं नौरंगपुर की 444 एकड़ जमीन बिल्डरों ने खरीद ली। 24 अगस्त 2007 को मुआवजा राशि की घोषणा करने की बजाय जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया गया। इस तरह बिल्डरों ने 444 एकड़ जमीन अधिग्रहण का भय दिखाकर खरीद ली।

वहीं, ओमप्रकाश यादव (पूर्व सरपंच, मानेसर) का कहना है कि बिना सरकार की मिलीभगत के सेक्शन 9 का नोटिस जारी होने के बाद कोई जमीन नहीं खरीद सकता। सेक्शन 9 का नोटिस जारी होने का मतलब है कि जमीन सरकार की हो गई। इसके बाद भी बिल्डरों ने जमीन खरीदी। साफ है कि सरकार व बिल्डरों की मिलीभगत थी। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से भी साफ हो गया कि तत्कालीन सरकार व बिल्डरों की मिलीभगत थी।

यहां पर बता दें कि शिकोहपुर जमीन घोटाले को लेकर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीधे-सीधे गुरुग्राम पुलिस के चंगुल में फंस गए हैं। दोनों को इस मामले में नामजद किया गया है। नामजद शिकायत की वजह से अब मामले में सीधे-सीधे दोनों से पूछताछ संभव है।

गौरतलब है कि शनिवार को नूंह जिले के राठीवास गांव निवासी सुरेंद्र शर्मा ने राबर्ट वाड्रा एवं भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी डीएलएफ एवं ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के खिलाफ खेड़कीदौला थाने में एफआइआर दर्ज कर कराई है। दो साल पहले एक जमीन घोटाले में प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मानेसर के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश यादव ने मानेसर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत नामजद नहीं थी। चूंकि यह मामला हुड्डा से जुड़ा है, सो जांच सहायक पुलिस आयुक्त स्तर पर होगी।

Posted By: JP Yadav