नई दिल्ली [निहाल सिंह]।  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) 2019 के विरोध के नाम पर देश में खूब सियासत हुई थी। दिल्ली के शाहीनबाग में महीनों रास्ता बंद करके प्रदर्शन किया गया। राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में नफरत फैलाने की कोशिश की गई। कथित बुद्धिजीवी इस कानून के विरोध में देशवासियों को भ्रमित करने की कोशिश में आज भी हैं, लेकिन बांग्लोदश में पूजा पंडालों में जिस तरह से हिदुओं को निशाना बनाया जा रहा है उससे स्पष्ट है कि सीएए केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया सही कदम है। यह कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश व पाकिस्तान में उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिमों को सुरक्षा देने वाला है।

सीएए की आवश्यकता पर बल देते हुए विश्व हिंदू परिषषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाइयों पर धर्म के आधार पर भेदभाव व आक्रमण होता है। उनकी संपत्ति, महिलाओं की सुरक्षा भी खतरे में है, इसलिए यह आवश्यक है कि ऐसे लोगों को भारत अपनी परंपरा के अनुसार शरण दे और सम्मान से अपना जीवन व्यतीत करने की सुविधा दे। इसी जरूरत को ध्यान में रखकर सीएए बना है। पड़ोसी देशों में घट रहीं हिसक घटनाएं सीएए की आवश्यकता को उल्लेखित करती हैं। उन्होंने कहा कि बंग्लादेश में हो रही हिसा निदनीय है। वहां की सरकार हिदुओं के खिलाफ हो रही हिसा को रोकने व अपराधियों को सजा देने के लिए ठोस कदम उठाए।

दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं जग आसरा गुर ओट (जागो) पार्टी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा कि सीएए नरेन्द्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला था। 25 साल से वह अफगानी सिखों व हिदुओं की लड़ाई लड़ रहे थे, उनकी किसी ने नहीं सुनी। मोदी सरकार ने उनकी ओर ध्यान दिया। सीएए का विरोध करने वालों की आंखों पर यदि अब भी पट्टी बंधी हुई है तो वे लोग सीधे तौर पर राजनीति के सिवाय कुछ नहीं कर रहे हैं।

रक्षा विशेषज्ञ व इंडिया फाउडेंशन के निदेशक मेजर जर्नल (सेवानिवृत्त) ध्रुव सी कटोच ने कहा कि अफगानिस्तान में बीते दिनों जो कुछ हुआ है और इन हमलों के पीछे जो मानवता विरोधी सोच है वह अब पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी तेजी से फैल रही है। बांग्लादेश में बहुत कम अल्पसंख्यक रह गए हैं। उन्हें भी निशाना बनाया जा रहा है। इसे देखते हुए स्पष्ट है कि सीएए बहुत जरूरी है। पड़ोसी राज्यों में हिंदू और सिखों के लिए भारत के अलावा और कोई जगह नहीं है। तीनों पड़ोसी मुल्क मुस्लिम देश हैं। वहां पर दिक्कत सिर्फ गैर मुस्लिमों को है।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी यासिर जिलानी ने कहा कि पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के साथ धर्म के आधार पर उत्पीड़न हो रहा है। ऐसे में उनको भारत में शरण देने के लिए सीएए की आवश्यकता है। सरकार ने एक उचित कदम उठाया था। बांग्लादेश और अफगानिस्तान की घटनाओं से सभी की आंखें खुल जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि वषर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने सीएए कानून में संशोधन किया था। इस संशोधन के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आने वालें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता देना था।

Edited By: Prateek Kumar