नई दिल्ली [राकेश कुमार सिंह]। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आईसीआईसीआई बैंक को 158 करोड़ का चूना लगाने वाले भगोड़ा अमन पुनीत सिंह कोहली को आईजीआई एयरपोर्ट से गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। बैंक अधिकारी ने तीन आरोपितों के खिलाफ 2017 में मुकदमा दर्ज कराया था। एक आरोपित अंकित कपूर को पुलिस पहले गिरफ्तार कर चुकी है। वह अभी जमानत पर बाहर है। तीसरा आरोपित कैलिफोर्निया की जेल में बंद है। उसे प्रत्यर्पण पर भारत लाने की कोशिश जारी है।

पुलिस के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक ने शिकायत में बताया था कि आरोपितों ने 18 खाताधारकों द्वारा नारायणा विहार शाखा में 467 नकली विदेशी आवक प्रेषण प्रमाणपत्र (एफआईआरसी) जमा किए थे। एफआईआरसी दो साल के दौरान बैंक में जमा किए गए थे। एफआईआरसी प्राप्त होने पर, आईसीआईसीआई बैंक ने उक्त खाताधारकों को बैंक वसूली प्रमाणपत्र (बीआरसी) जारी किए, जिन्होंने विदेश व्यापार नीति के तहत डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के कार्यालय से व्यापार (निर्यात) लाभ प्राप्त किया था। इससे बैंक को 158 करोड़ का नुकसान हुआ था। आईसीआईसीआई बैंक की नारायणा विहार शाखा से शिकायत मिलने के बाद कॉर्पोरेशन बैंक, भीकाजी कामा प्लेस से सत्यापन कराया गया जिसमें सभी एफआईआरसी फर्जी पाए गए थे। इसके बाद 11 जनवरी 2017 को आर्थिक अपराध शाखा में केस दर्ज कराया गया।

जांच के दौरान फर्जी एफआईआरसी के साथ मूल खाता खोलने के फॉर्म भी जब्त किए गए। बैंक ने पुष्टि की थी कि उनके बैंक से एफआईआरसी जारी नहीं किए गए थे। डीजीएफटी के कार्यालय से की गई जांच में पता चला कि उक्त फर्जीवाड़े से 158 करोड़ का चूना लगाया गया। अमन पुनीत सिंह कोहली और अंगद पाल सिंह ने अपने कर्मचारियों के नाम पर फर्म बनाकर कारोबार किया था। अन्य देशों में इनके संपर्क थे, जहां ये उच्च मूल्य पर माल का निर्यात करते थे, लेकिन, वास्तव में व्यापार लाभ प्राप्त करने के लिए ये विदेशी आवक प्रेषण प्रमाणपत्र जैसे जाली दस्तावेज बनाये जाते थे। इसमें कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस अमनपुनीत सिंह कोहली को गिरफ्तार करने के लिए कई बार कोशिश की थी लेकिन लगातार ठिकाना बदलने के कारण वह पुलिस के हाथ नहीं आ रहा था जिससे कोर्ट में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। 10 जून को सूचना मिली कि वह फ्लाइट से मुंबई से दिल्ली आ रहा है। पुलिस टीम ने उसे एयरपोर्ट से बाहर आते ही दबोच लिया। वह मुंबई का मूल निवासी है। अगस्त 2020 में वह दिल्ली आकर छिपकर रहने लगा। उसने अंगद पाल सिंह और अंकित कपूर (पहले गिरफ्तार) के साथ कारोबार शुरू किया था। दोनों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बैंक में जाली दस्तावेज पेश किए और बीआरसी जारी करवाए। पूछताछ में अमन ने बताया कि वह आस्क ग्रुप (इंडिया) का मालिक है और मुख्य आरोपित अंगद पाल सिंह का चचेरा भाई है। इसने बीकॉम प्रथम वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके पिता भी आयात-निर्यात के व्यवसाय में थे। इसने 2008 में यह धंधा शुरू किया था।

Edited By: Prateek Kumar