नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। एक साधारण कार्यकर्ता, जनसंघ और संगठन की यात्रा की कहानी है यह पुस्तक। यह संघर्ष और सफलता की है। यह जनसंघ के गठन से अब तक कार्यकर्ताओं का योगदान और नेताओं के त्याग के साथ आम कार्यकर्ता के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और जनसंघ के भाजपा बनने की चार दशक की यात्रा है। ये बातें मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में 'अमित शाह और भाजपा की यात्रा' पुस्तक पर आयोजित परिचर्चा के दौरान इसके लेखक डॉ. अनिर्बान गांगुली ने कहीं।

शतरंज और क्रिकेट के हैं शौकीन

डॉ. गांगुली और पुस्तक के सहलेखक शिवानंद द्विवेदी के साथ दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर अनंत विजय ने बातचीत की तो दोनों लेखकों ने बताया कि अब तक लोगों ने अमित शाह को गंभीर मुद्रा में देखा है, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक पहलू यह भी है कि उन्हें शतरंज और क्रिकेट खूब पसंद है।

भजिया खाने के साथ शायरी भी है पसंद

वे भजिया खाने के शौकीन हैं और शायरी भी पसंद करते हैं। इसके अलावा गाना सुनना और 'वैष्णव जन..' को गुनगुनाना भी उन्हें अच्छा लगता है। पुस्तक लिखने का उद्देश्य यह है कि आज के युवा व अन्य लोग यह जानें कि वंशवाद, परिवारवाद, तुष्टिकरण और जातिवाद के बजाय एक दल की विचारधारा कार्यकर्ताओं के साथ कैसे लगातार बढ़ती है।

अध्‍यक्ष बनने की यात्रा का वर्णन

यह पुस्तक भारत की राजनीति को नए तरीके से समझने की जरूरत महसूस करते हुए लिखी गई। जनसंघ और भाजपा की उन्नति के साथ एक 13 वर्ष के बालक के राजनीतिक सफर की शुरुआत से लेकर उसके सबसे कम उम्र के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की यात्रा है।

जमीन स्‍तर पर भाजपा को किया मजबूत

पुस्तक में बताया गया है कि 13 वर्ष की उम्र में अमित शाह सरदार वल्लभ भाई पटेल की बेटी के लिए मेहसाणा की गलियों में झंडा लेकर दौड़े थे। गलियों में पोस्टर चिपकाने, पर्चे बांटने से लेकर किस तरह जमीनी स्तर पर उन्होंने भाजपा को मजबूत किया। देर रात तक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक, पुराने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर युवाओं को जोड़ने के लिए हजारों मील की पैदल यात्रा, बस व ट्रेन का सफर और रात्रि प्रवास किया।

पीएम से जुड़ी बातें भी हैं किताब में
गुजरात निर्वासन के दौरान कहां रहे और उस समय संगठन के लिए क्या किया। आइडिया ऑफ इंडिया, तिरंगा यात्रा और बनारस के कायाकल्प के साथ गंगा और बनारस तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने से जुड़ी बातें भी हैं।

आपातकाल में जनसंघ को किया मजबूत

परिचर्चा से पहले दैनिक जागरण के उत्तर प्रदेश के स्टेट एडिटर आशुतोष शुक्ल ने बताया कि यह पुस्तक व्यक्तित्व के निर्माण को जानने में मदद करती है। किस तरह से आपातकाल के दौरान बने जनसंघ को मजबूत करने के साथ अमित शाह ने खुद को मजबूत किया। इस दौरान हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर रमा ने अमित शाह को आज की राजनीति का चाणक्य बताते हुए कहा कि देश को आजादी सात दशक पहले मिली थी, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता अब विकसित हुई है।

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Posted By: Prateek Kumar

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