नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना संकट के बीच एंबुलेंस संचालक भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठाने में जुट गए हैं। एक एंबुलेंस के मालिक ने तो सारी हदें पार करते हुए एक महिला मरीज को गुरुग्राम से लुधियाना जाने के लिए 1.20 लाख रुपये की पर्ची काट दी। महिला की बेटी ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने वाली कंपनी के मालिक से बार बार अनुरोध किया कि यह रकम बहुत अधिक है, लेकिन उसने एक नहीं सुनी। अंत में मजबूर होकर महिला ने अपनी मां सतेंद्र कौर की सलामती के लिए 1. 20 लाख रुपये अदा कर दिए। बाद में उन्होंने यह पूरी बात ट्विटर पर साझा की, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया। इसके बाद छानबीन के दौरान इंद्रपुरी थाना पुलिस ने आरोपित मिमोह कुमार बूंदवाल को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पुलिस की सख्ती के बाद आरोपित ने पीड़ित महिला को रुपये वापस कर दिए। आरोपित मिमोह दसघरा गांव का रहने वाला है।

गुरुग्राम स्थित डीएलएफ फेज एक ई-ब्लॉक में रहने वाले अमनजोत ने बताया कि उनकी सास सतेंद्र कौर कोरोना संक्रमित थीं। उन्हें डीएलएफ फेज एक अर्जुन मार्ग स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन यहां पर आक्सीजन की सुविधा नहीं थी। ऑक्सीजन युक्त बेड की तलाश में कई अस्पतालों में संपर्क किया तो लुधियाना के एक अस्पताल में खाली बेड होने की जानकारी मिली। लुधियाना ले जाने के लिए एंबुलेंस की तलाश की, लेकिन गुरुग्राम में कहीं पर भी उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके बाद दिल्ली की एक एजेंसी कार्डियाकेयर एंबुलेंस प्राइवेट लिमिटेड से संपर्क किया और एंबुलेंस के मालिक ने इसके एवज में एक लाख 20 हजार रुपये वसूले।

बुजुर्ग सतेंद्र की बेटी इस उनके साथ लुधियाना में है। पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त उर्विजा गोयल के निर्देश पर इंद्रपुरी के थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व व मायापुरी के एसीपी विजय की देखरेख में टीम का गठन किया गया। टीम ने पर्ची पर दर्शाए गए पते से जानकारी एकत्र करने के बाद आरोपित को दबोच लिया। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद उसने कुछ दिनों तक डाक्टरी की नौकरी भी की, लेकिन बाद में इसने एंबुलेंस का कारोबार शुरू कर दिया। आरोपित से यह भी पता चला कि कोरोना के बढ़ रहे मामलों के बीच आजकल वह एक जांच लैब भी खोलने की कोशिश में लगा था।

कहीं से नहीं मिली मदद

अमनजोत की मानें तो उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा मुहैया कराए इमरजेंसी नंबरों पर भी संपर्क किया, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। अमनजोत का कहना है कि इससे पहले वह गुरुग्राम के पारस, पार्क व फोर्टिस जैसे अस्पतालों में गईं, लेकिन कहीं पर प्राथमिक इलाज भी मुहैया नहीं कराया गया। निजी अस्पताल सनराइज में सीधा बोल दिया कि पहले दो लाख नकद जमा कराओ फिर इलाज करेंगे।