नई दिल्ली [रितु राणा]। हौसले बुलंद हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है, उसकी शारीरिक कमजोरी भी फिर उसकी कामयाबी के बीच नहीं आती है। इंसान की शारीरिक कमी कभी भी उसे ऊंचाइयों तक पहुंचने से नहीं रोक सकती जब उसके हौसले बुलंद हों। इसका उदाहरण है हुसैन व उनके साथी। इन सभी लोगों ने अपनी शारीरिक कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए आज विदेश में भी अपना नाम कमा लिया है।

हुसैन ने 2016 में मधु विहार स्थित वी आर वन संस्था की शुरुआत की, जो स्पेशल व दिव्यांग बच्चों को कुछ कर गुजरने का मौका देती है। संस्था के संस्थापक हुसैन कहते हैं - 'हमें दया नहीं हमें मौका चाहिए।' टीम में हुसैन समेत गुलशन, विजय कुमार, हरबीर व सचित दिव्यांग हैं और अल्का, करुणा सरकार, प्रिया, अभिनव मूक-बधिर हैं, यह सभी लोग एक परिवार की तरह रहते हैं।

ये लोग स्टेज प्रस्तुति के लिए सभी तैयारियां स्वयं ही करते हैं। कोरियोग्रफी से लेकर कोस्ट्यूम डिजाइन, मेकअप आदि यही लोग करते हैं। हुसैन ने बताया कि वह देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर सांस्कृतिक समावेश का प्रदशर्न करते हैं। वह चाहते हैं कि वह समाज में गौरव, समानता और सश्क्त होकर जिएं, वह अपनी किस्मत खुद लिखना चाहते हैं। भगवान ने उन्हें जैसा बनाया है वह उसी में बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें कोई गम नहीं है कि दिव्यांग हैं उनका मानना है कि भगवान ने हमसे एक चीज छीनी है तो उसके बदले हमें बहुत कुछ दिया भी है। वह अपनी टीम के साथ अमेरिका, रशिया, इटली, दुबई, इस्तानबुल आदि देशों में जाकर भारतीय सांस्कृतिक का प्रदर्शन अपने नृत्य के माध्यम से कर चुके हैं। वह विदेशों में जाकर व्हीलचेयर पर नृत्य करके अपने देश की संस्कृति का समावेश बिखेर रहे हैं।

हुसैन ने बताया कि वह कई वर्षों से व्हीलचेयर पर नृत्य कर रहे हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 90 प्रस्तुतियां दे चुके हैं जिसके लिए उन्हें 2010 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से सराहना भी मिली है। उन्होंने बताया कि हाल में उनके पास 85 दिव्यांग बच्चे आते हैं, जिन्हें वह उनकी रुचि के अनुसार नृत्य सिखाते हैं।

कोरियोग्राफर गुलशन दिव्यांग हैं उन्होंने 2011 में व्हीलचेयर पर एक मिनट में 32 स्पिन करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। हाल में गुलशन ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़कर एक मिनट में 63 स्पिन करने का रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कोरियोग्राफर अल्का ने 2018 में तीन मिनट 42 सेकेंड तक नॉन स्टॉप भरत नाट्यम की एकल प्रस्तुति देकर सभी को हैरान कर दिया और उन्होंने इंटरनेशनल वूमेन अवॉर्ड अपने नाम कराया। मूक-बधिर होने के बावजूद अल्का ने इतनी देर तक नॉन स्टॉप प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि म्यूजिक जब बजता है तो वह अपने दिल की धड़कनों से उसे महसूस करती हैं और धड़कनों को महसूस करके ही वह नृत्य करती हैं।

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Posted By: JP Yadav

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